क्लोथिंग शॉप कैसे शुरू करें ?
इंसान की तीन मूलभूत ज़रूरतें होती हैं – रोटी, कपड़ा और मकान और इन्ही तीन ज़रूरतों से हज़ारों करोड़ के तीन बिजनेस निकलते हैं – Food Business, Clothing Business and Real Estate or Housing Business.
इनमे से भी पहली दो चीजें इन्सान की most basic necessity है, और historical facts इस बात की पुष्टि करते हैं कि फूडिंग एंड क्लोथिंग की डिमांड more or less हमेशा बनी रहती है.
आज इस आर्टिकल में हम बात करेंगे क्लोथिंग बिजनेस के बारे में और जानेंगे कि हम कम लागत में एक क्लोथिंग शॉप या कपड़ों की दुकान कैसे शुरू कर सकते हैं?
क्लोथिंग शॉप शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले decide करना होगा :
1. आप किस तरह के कपड़ों का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं ?
यहाँ तीन 3 broad categories हैं :
● Men’s Wear
● Women’s Wear
● Kids Wear
इनमे से आप किसी एक, एक से अधिक या इन सभी categories का चुनाव कर सकते हैं. Of course, उसी के अनुसार आपके पास बजट और स्पेस भी होना चाहिए.
इसके आलावा within these categories भी आपके पास कई विकल्प होते हैं. For example: Women’s wear में आप साड़ियाँ, सूट, वेस्टर्न वियर, etc में से परिधानों का चुनाव कर सकते हैं.
यानी, कुल मिलकर आपको पहले ये तय करना होगा कि आप किस तरह के कपड़ों का बिजनेस करना है.
2. शॉप की साइज़ और लोकेशन
कपड़ों का चुनाव करने के बाद अब आपको तय करना होगा कि आप किस साइज़ की दुकान किस मार्केट में ओपन करना चाहते हैं?
किसी भी दुकान की लोकेशन उसकी सफलता में बड़ा रोल प्ले करती है. इसलिए जगह चुनने से पहले इन चीजों का ध्यान रखें :
● उस इलाके में footfall कैसा है ?
● पार्किंग फैसिलिटी अच्छी है या नही ?
● आस-पास कैसी दुकानें हैं?
● डेमोग्राफिक्स कैसी है ?
3. बजट
अपनी चॉइस के हिसाब से आपको अपना बजट तैयार करना होगा, ये काम आप शुरुआत में भी कर सकते हैं और बजट के हिसाब से आगे बढ़ सकते हैं. खैर, किसी पॉइंट पर आकर आपको बजट तय करना होगा. और इन चीजों के लिए पैसों का इंतजाम करना होगा :
● दुकान का रेंट, इंटीरियर या अपनी दुकान खरीदने के पैसे
● कपड़ों स्टॉक
● स्टाफ की सैलरी
● बिजली बिल
● एडवरटाइजिंग
● इत्यादि
4. कम दाम में अच्छी क्वालिटी के कपड़े कहाँ से लें ?
दोस्तों,आप जब भी मार्केट जाते हैं तो आप बहुत सी कपड़ों की दुकानों को देखते हैं. पर क्या आप जानते हैं इन दुकानों में माल कहाँ से मंगाया जाता है?
ऐसी ज्यादातर दुकानों में माल आता है टेक्सटाइल हब ऑफ़ इंडिया सूरत से. क्योंकि भारत में सूरत ही वो जगह है जहाँ सबसे कम दाम में अच्छी क्वालिटी के कपड़े मिलते हैं.
अब बात आती है कि सूरत के अन्दर हज़ारों होलसेलर्स हैं, ऐसे में आप किस जगह से स्टॉक सलेक्ट करना सबसे अच्छा रहेगा?
तो इसका जवाब है : अजमेरा फैशन
अजमेरा फैशन सूरत के most awarded और सबसे बड़े टेक्सटाइल manufacturer हैं. इनकी सबसे ख़ास बात है कि ये रिटेलर्स को भी उसी दाम पर प्रोडक्ट्स देता है जिसपर बड़े-बड़े होलसेलर माल उठाते हैं यानी आप किसी होलसेलर की बजाय अजमेर फैशन से माल लेते हैं तो आपका प्रॉफिट मार्जिन बढ़ जाता है.
दूसरा बड़ा एडवांटेज ये है कि अजमेरा फैशन में आपको Men’s Wear, Women’s Wear और Kids Wear की विशाल रेंज उपलब्ध कराता है यानी आप एक छत के नीचे अपनी ज़रूरत का हर एक परिधान प्राप्त कर सकते हैं.
इसके अलावा अजमेरा फैशन आपको बिना सूरत गए भी सिर्फ एक फ़ोन कॉल या WhatsApp message [9998962536] के जरिये भी प्रोडक्ट मंगाने की सुविधा देता है.
हालांकि, जैसा कि अजमेरा फैशन के फाउंडर & CEO Ajay Ajmera कहते हैं, पहली बार आप खुद सूरत आकर माल आर्डर करें, आगे से भले ही आप ऑनलाइन आर्डर कर दें.
5: ग्राहकों तक अपना प्रोडक्ट पहुंचाएं
Company Website and Contact Info: Link – https://ajmerafashion.com/
Link – https://www.youtube.com/c/AjmeraFashionSyntheticSareeManufacturer
Contact info – Call or WhatsApp – [ 9998962536]
Ajmera Fashion. D-5491, 3rd Floor, Lift No.15, Raghukul Textile Market,
Ring Road, Surat, Gujarat, India – 395002 Email – [email protected]
अपने कस्टमर्स की डिमांड पूरी करने के लिए सही दाम में सही प्रोडक्ट्स प्रोक्योर करने के बाद आप पूरे कॉन्फिडेंस के साथ उसे अपने ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास करें.
इसके लिए आप अपने स्टोर को अच्छे से सेटअप करें और अपने स्टाफ को भी कस्टमर डीलिंग के तरीके समझाएं.
आप एडवरटाइजिंग के कन्वेंशनल तरीके जैसे – प्रिंट मीडिया, होर्डिंग्स, पम्प्लेट्स, के अलावा ऑनलाइन तरीकों जैसे
Facebook, whatsapp, instagram, वेबसाइट, ecommerce sites का भी इस्तेमाल करें.
दोस्तों, ये थीं क्लोथिंग शॉप शुरू करने से रिलेटेड कुछ प्रैक्टिकल बातें. उम्मीद करते हैं ये जानकारी आपके काम आएगी और आप अपनी कपड़ों की दुकान शुरू करके अच्छा मुनाफ़ा कमा पायेंगे.
एक हाउसवाइफ ने कैसे खड़ा किया 10 करोड़ रु का साड़ियों का बिजनेस !
दोस्तों, यूँ तो दुनिया में लाखों तरह के बिजनेस हैं पर ऐसे बहुत कम ही बिजेनस हैं जिन्हें कर के लाखों लोग करोड़पति बन चुके हों… कपड़ों का बिजनेस एक ऐसा ही बिजनेस है जो सदियों से चला आ रहा है और जिसने लाखों लोगों को करोड़पति बनाया है और आज मैं आपको एक ऐसी हाउसवाइफ की कहानी बताने जा रहा हूँ जिन्होंने सिर्फ 50 हज़ार रु से साड़ियों के बिजनेस की शुरुआत की और आज उनका टर्नओवर 10 करोड़ रु से भी अधिक है.
वो साल 2010 था. दिल्ली की ज्योति वाधवा बंसल अपने पति अंशुल बंसल और 2 साल की बेटी के साथ हंसी-ख़ुशी रहती थीं. पति Yes Bank में वाईस प्रेसिडेंट थे. सब कुछ बहुत smoothly चल रहा था. लेकिन तभी शादी के करीब 4 साल बाद पति ने ऐलान कि अब मुझे जॉब नहीं करनी मैं अपना खुद का बिजनेस करना चाहता हूँ.
अब ज्योति असमंजस में आ गईं क्योंकि अंशुल की कमाई से ही घर चल रहा था और उनके अचानक नौकरी छोड़ देने से सब कुछ बदलने वाला था. दिल्ली के नामी टैगोर इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ी ज्योति ने 2003 में Amity Business School से MBA भी किया था और इसके बाद 3 साल तक एक MNC में जॉब भी की थी.
ज्योति के मन में यही उधेड़बुन चल रही थी कि financially secure होने के लिए उन्हें कुछ करना होगा. मन में जॉब करने बात आई पर जब बिटिया का मुंह देखा तो लगा इतनी छोटी बच्ची उनके बिना कैसे रहेगी…इसीलिए तय किया कि कुछ अपना करना है और घर से ही करना है.
पास में कुल मिला-जुला कर पचास हज़ार रु की सेविंग्स थीं. आत्मविश्वास कमजोर था पर ऐसे वक़्त में उन्होंने निराश होने की बजाय उन दिनों को याद किया जब शादी के बड़ा उन्होंने अपनी सेहत सुधारने के लिए नेचर कैंप ज्वाइन किया था और योग करके अपने आप को फिट बनाया था.
ज्योति बताती हैं कि खुद को फिट बनाना कोई बहुत बड़ी अचीवमेंट नहीं थी लेकिन इसने एक बात मेरे मन में बैठा दी कि , “ हर एक समस्या और हर एक समाधान मेरे अपने अन्दर है.” और इस सोच ने मुझे शक्ति दी कि ज़िन्दगी के इस दोराहे पर मैं अपना रास्ता ज़रूर ढूंढ लुंगी.
तब ज्योति ने आँख बंद की और कहा – “I want to be successful, please Universe guide me to become successful.”
और वो कहते हैं न – जब आप किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहें तो सारी कायनात आपको उससे मिलाने की साजिश करने लगती है. ज्योति को किसी रिश्तेदार ने online business शुरू करने की सलाह दी. ज्योति जी-जान से इस आईडिया को एक्स्प्लोर करने में जुट गयीं. हर दिन वो मार्केट रिसर्च पर 5-6 घंटे देने लगीं.
धीरे-धीरे उन्हें ये समझ आने लगा कि ऐसा कौन सा प्रोडक्ट है जिसकी demand भी खूब है और जिसमे मुनाफा भी जम कर कमाया जा सकता है.
और वो प्रोडक्ट था – साड़ी
एक ऐसा प्रोडक्ट जिसमे न साइज़ का चक्कर था न एक्सपायर होने की झंझट न डिजाईन की कमी थी न variety की shortage
ये ऐसा बिजनेस था जिसे करने के लिए इन्वेस्टमेंट भी बहुत अधिक नहीं चाहिए थी. Jyoti ने मन में ठान लिया कि अब वे ऑनलाइन साड़ियों का बिजनेस करेंगी.
अपने रिसर्च के दौरान, ज्योति ने एक बात नोटिस की थी कि सिल्क फैब्रिक की डिमांड काफी थी. उन्होंने बाजारों में जाकर handcrafted सिल्क साड़ियाँ देखना शुरू की. जैसे-जैसे वे साड़ियाँ देखती गईं उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया….लगा कि यही वो चीज है जिसकी उन्हें तलाश थी और वे इसे बेच सकती हैं. फिर क्या था अपने पास जमा किये हुए 50 हज़ार रु लेकर वे निकल पड़ीं सिल्क साड़ियों की खरीदारी करने.
और यहीं से उन्होंने कुछ साड़ियाँ कलेक्ट की और 2010 में Ebay पर जन्म हुआ Sanskriti Vintage का.
शुरुआत में कई दिक्कतें आयीं… यहाँ तक कि पहेल दो महीने तो एक भी आर्डर नहीं आया… कई बार लगा कि पैसा डूब गया…पर फिर भी ज्योति इसलिए टिकी रहीं क्योंकि भले कस्टमर साड़ियाँ खरीद नहीं रहे थे पर हर रोज कुछ लोग उनके ऑनलाइन स्टोर पर विजिट कर रहे थे और उनके प्रोडक्ट्स की तारीफ़ कर रहे थे.
धीरे-धीरे साड़ियाँ बिकना शुरू हुईं…इसके बाद भी challneges कम नहीं थे…
कस्टमर के टेस्ट के अनुसार साड़ी खरीदना, उसकी फोटो लेना…site पर अपलोड करना… उसका catchy description लिखना….ये सब पहले बहुत मुश्किल…फिर मुश्किल और फिर आसान हो गया.
कोई स्टाफ न होने के कारण ज्योति खुद ही अपनी बेटी के साथ लम्बी-लम्बी लाइनों में लग कर पोस्टल सर्विसेज के माध्यम से ग्राहकों को साड़ियाँ शिप किया करती थीं.
ऊपर से आये दिन मार्केट जा कर अच्छी साड़ियाँ सेलेक्ट करना भी एक बड़ा टास्क था… पर ज्योति ने ये सब किया और अपने ऑनलाइन स्टोर का एक बच्चे की तरह ध्यान रखा.
अमेरिकी ग्राहकों को ध्यान में रख कर ज्योति ने handcrafted silk sarees, chikankari, crepe, jaipuri prints और embroidery work जैसे कि luukhnowi chikan, zari, zardozi, और hand embroidered phulkari वाली साड़ियों का स्टॉक बढ़ा दिया.
हर फील्ड कीतरह यहाँ भी competition था जिसे ज्योति ने अपनी स्मार्ट थिंकिंग से beat किया…. उन्होंने अपना मार्जिन कम रखते हुए फ्री शिपिंग की सुविधा दी… जिस समय लोग 2mega pixel camera से फोटो खींच कर ebay पर उपलोड करते थे उस वक़्त ज्योति ने dslr camera use करना शुरू कर दिया.
उन्होंने हर एक कस्टमर को importance दी और उनके फीडबैक को seriously लेकर बिजनेस के हर एक पहलु को सुधारा.
इसका नतीजा ये हुआ कि पहेल साल में ही उन्होंने 15 लाख रु की साड़ियाँ बेच दी और एक employee भी रख लिया.
ज्योति बताती हैं – “मैंने अपने घर के एक कमरे से शुरुआत की थी, जहाँ मेरे पास एक कपड़े रखने के लिए एक अलमारी थी। छह महीने के अन्दर मैंने प्रोडक्ट्स की रेगुलर शिपिंग करने के लिए एक लड़की को काम पर रख लिया क्योंकि मैं लाइन में खड़ी हो कर अपना टाइम नहीं वेस्ट करना चाहती थी…. मुझे अपने ग्राहकों के लिए नए प्रोडक्ट्स खोजने और उन्हें खरीदने में टाइम लगाना था.”
2 साल के अन्दर बिजेनस काफी बढ़ गया. उधर पति अंशुल बंसल का बिजनेस रफ़्तार नहीं पकड़ पा रहा था…इसलिए वे भी ज्योति का साथ देने साड़ियों के बिजनेस में आ गए.
अब काम करने के लिए ज्योति ने नॉएडा में रेंटेड स्पेस ले लिया जहाँ से वे अब भी 30 लोगों की टीम के साथ काम करती हैं.
आज उनकी टीम में professional photographers हैं, defect free product ही शिप हो यह ensure करने के लिए बन्दे हैं, quality कण्ट्रोल और क्वालिटी चेक के लिए dedicated टीम है.
Sanskriti Vintage की शनदार सलफता के लिए हम ज्योति वाधवा बंसल को ढेरों शुभकामनाएं देते हैं
इसलिए हिम्मत जुटाइये और शुरुआत करिए अपने खुद के बिजनेस की और अपनी कड़ी मेहनत से उसे सफल बना कर ही दम लीजिये.
All the best!
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कम लागत में कैसे शुरू करें रेडीमेड गारमेंट का बिजनेस
कपड़ा हम सबकी बेसिक ज़रूरतों में से एक है. यही कारण है कि इस ज़रुरत को पूरा करने के लिए सदियों से लोग टेक्सटाइल या कपड़ों का बिजनेस करते आ रहे हैं. अगर हम अपने आस-पास देखें तो छोटी-छोटी दुकानों से लेकर बड़े-बड़े शो रूम कपड़ों का बिजनेस कर रहे हैं. इस बिजनेस में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के पीछे की वजह है कपड़ों की Big Demand & Big Profit.
देश की इकनोमिक ग्रोथ ने लोगों की per capita income के साथ-साथ बढती ही जा रही है. शायद आपको जान कर आश्चर्य हो कि आज़ादी के समय भारत की per capita income सिर्फ Rs. 250 थी, जो अब बढ़कर 90,000 रु के करीब पहुँच गई है.
इस बढ़त ने लोगों को purchasing power प्रदान की है जिसका एक बड़ा हिस्सा लोग फैशन परिधानों पर खर्च करते हैं. और इसीलिए रेडीमेड गारमेंट्स का बिजनेस एक ट्रेडिशनल बिजनेस होने के बावजूद आज भी एक बेहद promising और मुनाफे वाला बिजनेस है.
इस बिजनेस को करने का जो conventional तरीका है वो है – आप अपने या अपने आस-पास के क्षेत्र में मौजूद कपड़ों के होलसेलर से कपड़े खरीदते हैं और उसे अपनी दुकान या शो रूम के माध्यम से बेचते हैं.
लेकिन मैं आपको गारमेंट बिजनेस करने का एक नया और आजमाया हुआ तरीका बताऊंगा जिसे अपना कर आज हज़ारों लोग कपड़ों का बिजनेस कर रहे हैं और अच्छा-ख़ासा प्रॉफिट कमा रहे हैं.
लेकिन तरीका बताने से पहले आपसे एक सवाल?
क्या आप जानते हैं किस शहर को “Textile Capital of India” कहते हैं ?
सही जवाब है “सूरत”, जी हाँ गुजरात का ये शहर महिलाओं की साड़ियों, पुरुषों के पैंट-शर्ट से लेकर बच्चों के कपड़ों तक सब कुछ manufacture करता है. पूरे भारत में यही वो जगह है जहाँ सबसे कम दाम में कपड़े मिलते हैं. आपके आस-पास के ज्यादातर होलसेलर भी यहाँ की फैक्ट्रियों से माल ले जाकर अपने इलाके में बेचते हैं.
तो अब बात करते हैं उस तरीके की जिससे आप कम लागत में रेडीमेड गारमेंट का बिजनेस शुरू कर सकते हैं.
इसके लिए आपको ये Steps लेने हैं:
- Decide करना है कि आप कौन से रेडीमेड गारमेंट का बिजनेस करना चाहते हैं?
इसमें आपके पास ढेरों विकल्प हैं लेकिन अगर आप पहली बार कपड़ों के बिजनेस में उतर रहे हैं तो मैं आपको साड़ियों के बिजनेस से शुरुआत करने की सलाह दूंगा. क्योंकि –
- भारत में तीज-त्यौहार, शादी-ब्याह से लेकर डेली वियर तक साड़ियों की डिमांड बहुत अधिक रहती है.
- इसमें साइज़ का कोई चक्कर नहीं रहता. इसलिए आप लिमिटेड स्टॉक्स के साथ कम शुरू कर सकते हैं.
- साड़ी के साथ ब्लाउज, फाल, पेटीकोट भी बिक जाते हैं जिससे आपका मुनाफा बढ़ जाता है.
- साड़ियों की रेंज बहुत विशाल होती है आप 50 रु से लेकर 5000 हज़ार रु तक की साड़ियाँ रख सकते हैं.
- बिजनेस कहाँ से करेंगे इसका निर्णय करना है
ज़रूरी नहीं कि कपड़ों का बिजनेस करने के लिए आपके पास कोई दुकान या शोरूम होना ही चाहिए. आप घर से भी इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं. यदि आपके पास बजट कम हो तो घर से शुरू करना ठीक रहता है और जब एक बार काम जम जाए तो आप दुकान भी ले सकते हैं.
वहीँ, बजट का issue नहीं है तो आप दुकान खोलकर भी इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं.
- पैसे की व्यवस्था
यदि आप दुकान खोलकर बिजनेस करना चाहते हैं तो ज़ाहिर है आपको depending upon your area कुछ लाख रुपयों की आवश्यकता होगी. वहीं अगर आप घर से ये काम शुरू करना कहते हैं तो आप सिर्फ 25 हज़ार रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं.
- सूरत जा कर या सूरत से ऑनलाइन माल मंगाना
चूँकि और जगहों की तुलना में आपको सूरत में अच्छी क्वालिटी के कपड़े कम दाम में मिल जाते हैं और आप उन्हें आराम से 20% से लेकर 100% प्रॉफिट के साथ बेच सकते हैं इसलिए सूरत से ही माल खरीदें या मंगवाएं.
सूरत में कपड़े purchase करने के लिए आपके पास बहुत से options हैं लेकिन जहाँ तक मैं जानता हूँ आप सूरत के most awarded और सबसे बड़े साड़ी manufacturer Ajmera Fashion से माल खरीदकर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं.
Ajmera Fashion की सबसे ख़ास बात ये है कि जहाँ बड़ी फैक्ट्रियां सिर्फ होलसेलर को थोक रेट में माल देती हैं वहीं अजमेरा फैशन रिटेलर्स को भी उसी रेट में माल उपलब्ध करा देता है. साथ ही अगर आप किन्ही कारणों से सूरत नहीं जा पा रहे हैं तो आप इन्हें कॉल कर के या WhatsApp [ 9978435491, 7487915961 ] पर catalog मांगा कर अपना आर्डर प्लेस कर सकते हैं, जो पार्सल के जरिये आपके एड्रेस तक पहुंचा दिया जाता है.
हालांकि, मैं हमेशा यही recommend करता हूँ कि पहली बार आप खुद सूरत जा कर ही माल उठाएं, ताकि आप जिसके साथ डील कर रहे हैं उससे आपका एक सम्बन्ध बन पाए और उसपर आपका विश्वास भी पक्का हो पाए.
Ajmera Fashion का एक बड़ा advantage ये भी है कि यहाँ एक छत के नीचे आपको Women’s wear, Men’s wear, Kids wear की पूरी रेंज एक छत के नीचे मिल जाती है. यानी अगर आप किसी एक प्रोडक्ट के साथ बिजनेस शुरू करते हैं और दुसरे प्रोडक्ट्स में diversify करना चाहते हैं तो आपको कोई नया manufacturer नहीं खोजना पड़ेगा.
इसके आलावा Ajmera Fashion की सेल्स टीम काफी cooperative है. जो आपको आपके एरिया के टेस्ट के अनुसार सही प्रोडक्ट सेलेक्ट करने में मदद करती है और बिजनेस के हर स्टेप पे आपको गाइड करती है.
- अपने प्रोडक्ट को ग्राहकों तक पहुंचाना
जब आप सही प्रोडक्ट रखते हैं तो उसे बेचना आसान होता है क्योंकि आप खुद अन्दर से उसकी क्वालिटी और रेट को लेकर कॉंफिडेंट होते हैं. अब बस ज़रूरत है लोगों को इस बारे में बताने और अधिक से अधिक तरीकों द्वारा उन तक पहुँचने की.
और इसमें social media जैसे facebook, whatsapp, instagram इत्यादि आपको काफी मदद कर सकत है. In fact, मैं ऐसी कई महिलाओं को जानता हूँ जो सोशल मीडिया के जरिये घर बैठे बहुत अच्छा बिजनेस कर रही हैं.
पर ये भी ध्यान रखें कि आप सिर्फ सोशल मीडिया पर ही डिपेंड हो कर ना रह जाएं. अपनी झिझक पीछे छोड़ कर हर रोज खुद अधिक से अधिक कस्टमर्स से जाकर मिलें या यदि दुकान से बिजनेस शुरू किया है तो ग्राहकों को दुकान तक लाने का प्रयास करें.
- हिम्मत और मेहनत
And at last but not the least, business शुरू करने और उसे सफल बनाने के लिए आपको हिम्मत और मेहनत दोनों की ज़रुरत होती है.
इस आर्टिकल को पढने के बाद कई लोग बिजनेस करने की सोचेंगे लेकिन कुछ ही होंगे जो अगला स्टेप लेने की हिम्मत जुटा पायेंगे. आप भी उन कुछ लोगों में शामिल होइए क्योंकि अगर आप वही करते रहेंगे जो हमेशा से करते आये हैं तो आपको वही मिलता रहेगा जो हमेशा से मिलता आया है.
इसलिए हिम्मत जुटाइये और शुरुआत करिए अपने खुद के बिजनेस की और अपनी कड़ी मेहनत से उसे सफल बना कर ही दम लीजिये.
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सुकन्या समृद्धि योजना-Sukanya Samriddhi Yojana In Hindi
आज के समय में भारत में लिंगानुपात गिरना एक चिंता का विषय बन चूका है। सभी को पता है कि आज महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और एनी सभी जरूरतों के लिए सरकार के द्वारा योजनाएं चलाई जा रही हैं।
हमारे केंद्र के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा 4 दिसंबर, 2014 को बेटियों की शिक्षा और छोटी बचत योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से जमा की जाने वाली योजना “सुकन्या समृद्धि योजना” की शुरुआत की।
यह योजना सिर्फ बेटियों के लिए चलाई गई थी जिसमें सरकार ने बहुत बड़ा परिवर्तन किया है। अब इस योजना में जमा होने वाली राशी को एक हजार रूपए से दो सौ पचास रूपए कर दिया गया है।
इसमें बच्ची के माता-पिता या संरक्षक बेटी के नाम से खाता खुलवा सकते हैं। इस योजने के ऐसे बहुत से नियम हैं जिससे आपको सुकन्या योजना को समझने में आसानी होगी। आज हम आपको बताएंगे कि सुकन्या योजना से आपको क्या-क्या और कैसे लाभ हो सकते हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना क्या है-(Sukanya Scheme In Hindi) :
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा शुरू की गई सुकन्या योजना एक छोटी सी निवेश योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य बेटी के भविष्य के लिए उसके माता-पिता के द्वारा की गई बचत या निवेश है जो अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य, उसकी शिक्षा और उसके सपनों को पूरा करने के लिए एक छोटी राशि ला लंबे समय तक भुगतान करना पड़ता है।
सुकन्या योजना को 21 जनवरी, 2015 में शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों की पढाई और शादी के खर्च के लिए दी जाने वाली सहायता है। यह बेटियों के लिए चलाई गई एक पहल है।
इस योजना में व्यक्ति को हर महीने दो सौ पचास रूपए का भुगतान करना पड़ता है जिसमें उसे 8.5% का ब्याज मिलता है। यह योजना उन परिवार वालों के लिए चलाई गई है जो अपनी बेटी की शिक्षा और शादी के लिए पैसे बचाना चाहते हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना के फॉर्म-(Sukanya Scheme Form Details In Hindi) :
आप सुकन्या योजना का फॉर्म किसी पोस्ट ऑफिस या शाखा प्रबंधक से प्राप्त कर सकते हैं। इस फॉर्म में आपको कुछ बातों के जवाब लिखने होते हैं जैसे – कन्या का नाम, माता-पिता का नाम, कन्या की आयु आदि बहुत सी बातें होती हैं।
खाता खुलवाने के नियम : अगर आप अपनी बेटी के जीवन को उज्ज्वल करने के लिए सुकन्या योजना के भागीदार बनना चाहते हैं तो आपको इन नियमों के अंतर्गत अपनी बेटी के नाम पर खाता खुलवाना होगा।
- सबसे पहले आप अपने किसी नजदीकी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में जाएँ और वहां के प्रबंधक से इस योजना के बारे में जानकारी प्राप्त करें। जो उस शाखा का प्रबंधक होगा वह सुकन्या योजना के बारे में आपको हर बात बतायेगा।
- अगर आप लोगों पर विश्वास नहीं करते हैं या आपको लगता है कि आपके पैसे बीच में फंस जाएँगे तो आप इंटरनेट के माध्यम से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के वेबसाइट पर जाकर वहां से सुकन्या योजना के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- अपनी बेटी के नाम पर खाता खुलवाने के लिए आपके पास अपनी बेटी का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का फोटो, माता-पिता का पहचान पत्र, पैन कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, आवास का प्रमाण पत्र और माता पिता की तस्वीर का होना जरुरी होता है।
- अब आप अपने सुकन्या योजना के लिए भरे गए फॉर्म और आवश्यक दस्तावेजों को इकठ्ठा करके जमा कर दें। फिर फोटो के साथ एक हजार रूपए जमा करें। आप खाता खुल जाए तो आप चेक या ऑनलाइन भी पैसे भर सकते हैं।
- अगर आपकी बेटी दस साल से छोटी उम्र की है तो आप उसके नाम से खाता खुलवा सकते हैं लेकिन अगर उसकी उम्र दस साल से ऊपर है तो आप उसके नाम पर खाता नहीं खुलवा सकते हैं।
- इस योजने के अंतर्गत एक परिवार से आप सिर्फ दो बेटियों का ही खाता खुलवा सकते हैं इससे अधिक का नहीं।
- आप अपनी बेटी का तभी खाता खुलवा सकते हैं अगर आप भारतीय हैं क्योंकि इस योजना का फायदा भारतियों के लिए ही है।
खोले गए खाते की संख्या-(Number Of Account In Sukanya Scheme In Hindi) :
अगर आप अपनी बेटी का सुकन्या योजना के अंतर्गत खाता खुलवाना चाहते हैं तो आप बेटी के जन्म से लेकर दस वर्ष तक की आयु तक उसका खाता खुलवा सकते हैं। बेटी के नाम से जमाकर्ता सिर्फ एक ही खाता खुलवा सकता है।
अगर माता-पिता संरक्षण अपनी बेटी के नाम पर खाता खुलवाना चाहते हैं तो वे अपनी बेटी के नाम पर एक अलग-अलग खाता खुलवा सकते हैं। अगर आपको दो बेटियां अथार्त जुड़वां बेटियां हैं तो आप उनके जन्म के प्रमाण पत्र को दिखाकर तीसरा खाता भी खुलवा सकते हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना के लिए जमा होने वाली राशि :
सुकन्या योजना में आप शुरुआत में सिर्फ एक हजार रूपए तक की ही राशि जमा कर सकते हैं। पहले इस खाते है हर महीने एक हजार रूपए की राशि जमा करनी होती थी जो अब घटकर दो सौ पचास रूपए कर दी गई है।
अब इस खाते है एक वर्ष में जमा की गई न्यूनतम राशि दो सौ पचास रूपए और अधिकतम राशि एक लाख पचास हजार रूपए होती है। यह पैसा खाता खुलने के चौदह साल तक ही जमा करवाना होगा।
खाता संचालन : जब तक बच्ची दस साल की नहीं हो जाती तब तक उसके खाते को उसके माता-पिता को संचालित किया जाएगा और जब बेटी दस साल की हो जाएगी तो वह खुद खाते को संचालित कर सकेगी। इस योजना के अंतर्गत आप किसी भी पोस्ट ऑफिस ब्रांच या सरकारी बैंक में खाता खुला सकते हैं।
जमा की गई राशी को निकालने की शर्तें :
इस योजना में बालिका के अठारह साल के होने तक जमा की गई राशि में से वह केवल 50% ही निकाल सकती है। अगर किसी वजह से बच्ची की मौत हो जाती है तो संरक्षण के द्वारा खाते को बंद कर दिया जाएगा और पूरी राशि को ब्याज के साथ निकाल लिया जाएगा।
खाता मच्योर होने की तारीख :
जब आप बेटी के नाम से खाता खुलवाते हैं तो उस तारीख से लेकर 21 साल पूरा होने पर आपका खाता मच्योर हो जाएगा। जब लडकी की शादी अठारह साल के बाद या इक्कीस साल से पहले हो जाती है तो शादी की तारीख के बाद उसका खाता बंद कर दिया जाएगा। जब खाता बंद हो जाएगा तो उसके बाद जमा राशि को ब्याज समेत निकाला जा सकता है।
सुकन्या समृद्धि योजना के फायदे-(Sukanya Scheme Benefits In Hindi) :
1. आयकर में छूट : जो खाते इस योजना के तहत खोले जाएँगे उन खातों को कर से छूट दी जाएगी। इस योजना में जो खाते खुलेंगे उन्हें आयकर कानून की धारा के तहत कर में भी छूट दी जाएगी।
2. अनियमित भुगतान पर जुरमाना : जब ऐसा होता है कि किसी वजह से अनियमित भुगतान होता है तो उस पर हर साल कम-से-कम 50 रूपए का जुर्माना तय की गई राशि के साथ देना पड़ता है। जब बच्ची अठारह साल की हो जाएगी तो उसके खाते में जमा राशि का उसे 50% प्राप्त हो जाएगा जो उसकी शिक्षा और बाद में उसकी पूरी राशि उसकी शादी के लिए इस्तेमाल होगी।
3. पीपीएफ से ज्यादा ब्याज : पहले इस योजना में निवेश राशी पर टैक्स छूट दी जाती थी लेकिन अब इस बजट में इसके ब्याज पर परिपक्वता पर मिलने वाली धन राशि पर भी टैक्स की छूट दी जाएगी। इसमें यह योजना पीपीएफ के समान हो गई है जिसमें तीन स्तरों पर टैक्स से छूट मिलती है लेकिन ब्याज में यह योजना पीपीएफ से अधिक अच्छी है क्योंकि पीपीएफ में 8% ब्याज मिलती है जबकि सुकन्या योजना में 8.5% ब्याज मिल रही है।
4. ब्याज दर घटाई : सुकन्या योजना के अंतर्गत खोले गए खाते की कुल अवधि इक्कीस साल होती है और इस खाते पर 8.40% की ब्याज होती है। कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार ने छोटी बचत योजनाओं से 0.1% ब्याज की कटौती की जिसके बाद इन खातों से मिलने वाला ब्याज कम हो गया। बहुत से लोग यह मानते हैं कि इस योजना से जो ब्याज मिलता है वह परिवर्तनीय है। इसमें धारा सी के अंतर्गत टैक्स से छूट दी जाएगी।
5. सरकारी गारंटी : इस योजना में अगर आपको लगता है कि आपके पैसे डूब जाएँगे तो ऐसा नहीं है क्योंकि इसमें आपको सरकारी गारंटी दी जाती है कि आपके पैसे सुरक्षित रहेंगे।
खाते को स्थानांतरित करने की सुविधा : कभी-कभी ऐसा होता है कि कई कारणों की वजह से लोगों को अपने देश को छोड़कर जाना पड़ता है ऐसे में वे अपने सुकन्या योजना के अंतर्गत खोले गए खाते को किसी भी देश से किसी भी देश में स्थानांतरित करा सकते है।
सुकन्या समृद्धि योजना के लिए बैक सूची :
सुकन्या योजना खाते में दी जाने वाली सुविधा पोस्ट ऑफिस से लेने के अलावा 28 बैंक हैं जिन्हें सरकार ने खाता खोलने की अनुमति दी है।
- इलहाबाद बैंक
- एक्सिस बैंक लिमिटेड
- आंध्रा बैंक
- बैंक ऑफ बडोदा
- बैंक ऑफ महाराष्ट्र
- बैंक ऑफ इंडिया
- केनेरा बैंक
- कारपोरेशन बैंक
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- देना बैंक लिमिटेड
- आई डी बी आई बैंक लिमिटेड
- आई सी आई सी आई बैंक लिमिटेड
- इंडियन बैंक
- ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
- इंडियन ओवरसीज बैंक
- पंजाब और सिंध बैंक
- स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर
- पंजाब नेशनल बैंक
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
- स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
- स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद
- स्टेट बैंक ऑफ पटियाला
- सिंडिकेट बैंक
- स्टेट बैंक ऑफ त्रवंकोरे
- यूको बैंक
- यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
- विजया बैंक