बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi

बिजली के उपयोग पर निबंध (Essay on Importance of Electricity in Hindi) :

भूमिका : विज्ञान ने मनुष्य को अनेक वरदान स्वरूप अविष्कार दिए हैं जिनमें से बिजली भी एक वरदान है। बिजली का आविष्कार करके वैज्ञानिकों ने हम पर बहुत बड़ा अहसान किया है। हमारे जीवन में बिजली का बहुत उपयोग होता है। बिजली ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्त्रोत होता है जिसका प्रयोग अनेक कामों को करने के लिए किया जाता है।

बिजली को भाप या पानी से बनाया जाता है। बिजली वैज्ञानिकों के आविष्कारों की बहुत बड़ी नदी है जिससे यह दुनिया हैरान रह गई है। इसके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यह पूरा दिन मनुष्य के अनुसार काम करती है यह मनुष्य के लिए भोजन बनाती है, कमरे साफ कराती है और रात को दिन में बदल देती है।

बिजली आज हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है। आज के समय में घरों में बिजली का प्रयोग और अधिक बढ़ गया है। अगर थोड़ी बहुत देर के लिए बिजली चली जाती है तो बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है। आज के आधुनिक जीवन में बिजली मनुष्य के जीवन की एक बहुत बड़ी जरूरत बन गई है जिसके बिना मनुष्य किसी भी काम को करने में सफल नहीं होता है।

बिजली से चलने वाले उपकरण : हम बिजली चमत्कारों को चारों ओर आसानी से देख सकते हैं। आज के समय में हर घर में रोशनी, हवा, गर्मी, दूरी की वार्तालाप, समाचार सुनने के उपकरणों को देखा जा सकता है। आज हर घर में रोशनी करने और हवा देने के लिए उपकरण हैं जिससे हमारा जीवन आरामदायक बन गया है।

आजकल सडकों, दुकानों और घरों में रोशनी की व्यवस्था है। आज के समय में हम वो सब काम रात में भी कर सकते हैं जो सिर्फ दिन में किए जाते थे। पहले हम हवा के लिए मेहनत किया करते थे लेकिन आज पंखों के आविष्कार से हमारा जीवन और भी आरामदायक हो गया है। अब बिजली के प्रयोग से सर्दियों में भी गर्मी का आनंद ले सकते हैं।

बिजली के चूल्हों से खाना भी बनाया जाता है। बिजली से कपड़ों पर प्रेस भी की जाती है। बिजली की गर्मी से एक बहुत बड़ा फायदा होता है कि इससे कभी वायु प्रदूषण नहीं होता है। बिजली की वजह से तार और टेलीफोन जैसे साधन उपलब्ध कराये गये हैं। तारों और टेलीफोन के जरिए हम दूर-दूर तक अपने संदेश को भेज सकते हैं।

बेतर साधन की वजह से हम बिना तार के संदेश, फोटो भेजे जा सकते हैं। रेडियो से कहीं दूर होने वाले कार्यक्रमों को आसानी से सुना जा सकता है। बिजली का प्रयोग घर की औरतों के लिए एक वरदान की तरह सिद्ध होता है। रसोईघर में भी बिजली की मदद से खाना बनाया जाता है। कपड़े भी बिजली की मदद से धुल जाते हैं।

आजकल चटनी बनाने और मिर्च मसाले पीसने के लिए और जूस बनाने के लिए भी मशीनों का प्रयोग किया जाता है। आजकल घर-घर में कंप्यूटर को देखा जा सकता है वह भी बिजली के करण ही आया है। भारत अभी इतना विकसित नहीं हुआ है इसी वजह से घरों में कंप्यूटर बहुत कम दिखाई देते हैं। जब कंप्यूटर की उपयोगिता का पता चलेगा तो घरों में भी इसका प्रयोग अधिक होने लगेगा।

भारी मशीनों में उपयोग : बिजली का प्रयोग भारी मशीनों में भी किया जाता है। बिजली का सबसे अधिक प्रयोग परिवहन में किया जाता है। बिजली की मदद से ट्राम और रेलगाड़ियों को भी चलाया जाता है। बिजली के इंजन बहुत शक्तिशाली होते हैं और इनमें से किसी प्रकार के धुएँ के निकलने से प्रदूषण नहीं होता है।

इन यंत्रों को अधिक गति से भी चलाया जा सकता है और धीमी गति से भी। बिजली के सहारे संसार में ओद्योगिक क्रांति आ गई है। आज के समय में भरी-भरी औद्योगिक मशीने बिजली से ही चलाई जाती हैं। इन भारी-भारी औद्योगिक मशीनों से अनेक प्रकार की चीजें बनाई जाती हैं।

बिजली से बहुत भारी क्रेनें भी चलाई जा सकती हैं जो अधिक-से-अधिक बोझ को उठा सकती हैं। जो कारखाने बिजली से चलते हैं उनसे कभी वायु प्रदूषण नहीं होता है और दूसरे ऊर्जा के स्त्रोतों से यह बहुत सस्ती होती है। चिकित्सा के लिए भी बिजली का प्रयोग किया जाता है।

एक्स रे मशीनों को बिजली से चलाया जाता है जिससे रोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है और डॉक्टर हमें यह बताने में सक्षम हो जाता है कि हमारे शरीर की कौन सी हड्डी टूट गई है और कौन सी हड्डी ठीक है। अगर बीमारी है तो सर्जरी के लिए उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

बिजली की वजह से ही वायलेट जैसी अनेक किरणों का उत्पादन हुआ है जो अनेक रोगों के इलाज में प्रयोग की जाती हैं। बिजली से चलने वाली मशीनों की वजह से ही दिल की धडकन रुक जाने पर उसे फिर से सक्रिय किया जा सकता है। बिजली कृषि में भी अपना योगदान दे रही है। बिजली से कृषि के लिए ट्यूब और कुएँ चलाने के उत्पादन में बहुत मदद करता है।

मनोरंजन का साधन : बिजली की वजह से ही मनोरंजन के साधन उपलब्ध हो पाए हैं। बिजली की वजह से ही रेडियों, टेलीविजन, वी०सी०आर० जैसे साधनों को मनोरंजन के लिए बनाना संभव हुआ है। आज टेलीविजन की वजह से हम दूर किसी स्थान पर होने वाली महत्वपूर्ण घटना को आसानी से देख सकते हैं।

आज हम बहुत से खेलों जैसे- क्रिकेट, टेनिस, फुटबाल, कबड्डी, और वॉलीबाल का सीधा प्रसारण घर बैठे आसानी से देख सकते हैं। बिजली का प्रयोग मनुष्य की सभी गतिविधियों में किया जाता है। बिजली की वजह से हमारे सुख कई गुना बढ़ जाते हैं।

जो लोग निर्धन होते हैं उनके घरों में भी मनोरंजन की वस्तुएँ आसानी से देखी जा सकती हैं। लेकिन इन साधनों का प्रयोग केवल बिजली से ही किया जा सकता है अगर बिजली न हो तो इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

उपसंहार : बिजली का उपयोग बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है इसी वजह से इसके उपयोगों को गिनना बहुत अधिक कठिन है। बिजली ने हमारे जीवन के हर क्षेत्र को बहुत ही प्रभावित किया है। आज के समय में बिजली के बिना शहरी जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

बिजली का उपयोग घरेलू कामों में भी बहुत किया जाता है। हम इसका प्रयोग जितना चाहें उतना कर सकते हैं। बाजारों में बिजली से चलने वाले अनेक प्रकार के उपकरण मिल जाते हैं जिनका प्रयोग बहुत से घरों में किया जाता है। उपकरणों का प्रयोग व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह इनका प्रयोग कितना करता है।

भविष्य में बिजली का प्रयोग और भी अधिक विस्तृत रूप से हो जायेगा। ऐसा केवल कोई ही घर रहता है जिसमें बिजली का प्रयोग नहीं किया जाता है। बिजली हमारे जीवन की मूल आवश्यकता बन चुकी है इसके बिना जीना बहुत कठिन है।

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध (Essay On Delhi In Hindi) :

भूमिका : हमारा भारत एक विशाल देश है। भारत में कई प्रदेश हैं। भारत के हर प्रदेश में कई नगर हैं। भारत के हर नगर का अपने एक विशेष महत्व है। कोई नगर प्राकृतिक दृष्टि से अपना महत्व रखता है तो कोई सांस्कृतिक दृष्टि से गरिमापूर्ण है। कोई औद्योगिक दृष्टि से समृद्ध है तो कोई अपने धार्मिक स्थान होने की वजह से देश के निवासियों के लिए वंदनीय है।

कोई नगर ऐतिहासिक यादों को संजोये होने की वजह से देश-विदेश के लोगों को आकृष्ट करता है तो कोई नगर राजनीति में होने वाली हल-चल की वजह से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लेकिन दिल्ली भारत का एक विशाल नगर है जो अनेक नजरों से बहुत महत्वपूर्ण है। दिल्ली भारत की राजधानी है।

दिल्ली भारत का दिल भी है और धडकन भी। दिल्ली एक ऐसा दर्पण है जिसमें पूरे भारत का चित्र दिखाई देता है। दिल्ली राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रंगमंच है जो कहीं भी दिखाई नहीं देता। वास्तविकता में कहें तो दिल्ली भारत का दिल है। इसका उल्लेख कई साहित्यकारों ने किया। दिल्ली का एक नाम इंद्रप्रस्थ भी था।

दिल्ली की ऐतिहासिकता : दिल्ली भारत की एक ऐतिहासिक नगरी है। दिल्ली को ऐतिहासिक रूप से अनंगपाल और पृथ्वीराज की दिल्ली कहा जाता है। ये दिल्ली कभी तो फूलों की सेज पर सोई है और कभी काँटों का ताज पहन कर रोई है। कभी दुल्हनों की तरह सजी है और कभी इसके माथे से सिंदूर मिटाया गया है।

यवन बादशाहों ने भी यहाँ पर अपनी कूटनीति का जाल बिछाया था। कुछ राज वंशों ने इसे संवारा तो कुछ लुटेरों ने इसे लूटा भी और उजाड़ा भी। इस दिल्ली ने तैमूर और नादिरशाह के जन-संहार का करुण दृश्य देखा था। देश-विदेश के अनेक शिल्पियों ने दिल्ली के सौंदर्य को बढाया है। यहाँ पर हर कण-कण में इतिहास की गूंज सुनाई देती हैं।

जब कभी भी अंग्रेजी सरकार की विजय होती थी तब उसका मनोरंजन दिल्ली में ही मनाया जाता था। अंग्रेजों ने यहाँ पर अपनी प्रतिमाएं स्थापित करने की कोशिश की लेकिन वे इस बात को नहीं जानते थे कि दिल्ली भारत के निवासियों की भूमि है। यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ नारे लगे थे और हड़तालें हुई थी।

गाँधी, जवाहर लाल नेहरु और भगत सिंह जैसे देश भक्तों ने स्वतंत्रता की मांग की और अंत में अंग्रेजों को भारत छोडकर जाना ही पड़ा। स्वतंत्रता मिलने के बाद यहाँ के कई नेताओं ने दिल्ली का दुबारा से उद्धार किया था। दिल्ली में सभी अंग्रेजी शासन के निशानों को मिटा दिया गया था और भारतीयता के निशानों को स्थापित किया गया था।

भारत का ये नगर दिल्ली सभी देशों और विदेशों के लोगों के लिए भ्रमण की बहुत अच्छी जगह है। भारत सरकार इसे और अधिक सुंदर बनाने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहती है। दिल्ली की सडकें इतनी बड़ी हैं कि हर तरह की गाड़ी इस पर चल सकती हैं। सडकों के दोनों ओर फूल लगें हैं जो सडकों की शोभा बढ़ाते हैं।

दिल्ली की हर सडक किसी-न-किसी वाटिका का बोध करती है। दिल्ली की सडकों पर गाड़ी, बस, स्कूटर, मोटरसाईकिल और ट्रकों को हमेशा देखा जा सकता है। दिल्ली भारत की राजधानी है इसी वजह से यहाँ पर भारत सरकार के प्रमुख कार्यालय भी हैं। दिल्ली की आबादी बहुत अधिक है यहाँ पर एक करोड़ से भी अधिक लोग रहते हैं।

दर्शनीय स्थल : भारत के इस नगर का हर अंग दृश्यनीय है। दिल्ली ऐतिहासिक भवनों के लिए अतुल्य मानी जाती है। यहाँ पर अनेक भव्य इमारतें और चौड़ी सडक भी हैं। दिल्ली में सडक परिवहन के साथ-साथ रेल और वायु परिवहन की भी अच्छी व्यवस्था है।

यहाँ के बाजारों का अपना ही आकर्षण होता है ये सजे हुए बहुत सुंदर लगते हैं इसी वजह से लोग यहाँ पर घूमते हुए देखे जा सकते हैं। दिल्ली में बहुत से ऐतिहासिक स्थल जैसे – लाल किला, कुतुबमीनार, जंतर-मंतर, जामा मस्जिद, बिरला मंदिर, लोटस टेंपल, मोर्यकालीय लौह स्तंभ, छतर पुर मंदिर, इंडिया गेट, हुमायु का मकबरा, गुरुद्वारा सीसगंज हैं।

चांदनी चौक और कनाट प्लेस की सजावट देखने के योग्य होती है। लोटस टेंपल में सभी धर्मों के लोग बैठकर भगवान को याद करते हैं। लौह स्तंभ में कभी भी जंग नहीं लगता इसकी इसी विशेषता की वजह से यह आकर्षण का केंद्र बन गया है। पुराने किले में पांडवों के अवशेष देखे जा सकते हैं।

दिल्ली के सभी मैदानों की घास आँखों और पैरों के लिए बहुत सुख देती है। दिल्ली का चिड़ियाघर आकर्षण का केंद्र बन चुका है। दिल्ली के चिड़िया घर में अनेक प्रकार के पशु-पक्षी देखे जा सकते हैं। दिल्ली को उद्योग नगरी कहा जाता है। यहाँ पर हर मोहल्ले में उद्यान देखे जा सकते हैं।

यहाँ पर बड़ी-बड़ी कपड़ों की कंपनियां और अन्य उद्योग धंधे हैं। खेलों के आयोजन से भी दिल्ली की सुंदरता में चार-चाँद लग गये हैं। बड़े-बड़े मॉल्स से दिल्ली की शान और अधिक बढ़ गई है। दिल्ली में लोगों के रहने के लिए बड़ी-बड़ी इमारतें हैं जो आकर्षण का कारण बने हुए हैं।

दिल्ली में देश की राजनीतिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र संसद भवन है। दिल्ली में एक मुगल उद्यान है जो बसंत ऋतु में आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है और इस का आकर्षण का केंद्र गुलाब का फूल है जो यहाँ पर अनेक किस्मों में पाया जाता है। दिल्ली में एक अप्पूघर भी है जो बच्चों की आकर्षण की सैरगाह है।

उपसंहार : दिल्ली भारत का सबसे अधिक सुंदर और ऐतिहासिक नगर है। यहाँ पर समंवय का पाठ पढ़ाया जाता है। दिल्ली में बहुत से धर्मों और संप्रदायों व राजनीतिक दलों के लोग एक साथ एक परिवार की तरह रहते हैं। दिल्ली में संपन्नता और गरीबी की चर्म सीमा को देखा जा सकता है।

दिल्ली में अनेकता में एकता की भावना को देखा जा सकता है। दिल्ली को लघु भारत के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ के लोग साथ रहने के साथ-साथ सभी त्यौहारों को भी एक साथ मनाते हैं। दीपावली, दशहरा, होली, बैशाख, ईद, आदि प्रमुख त्यौहार मनाये जाते हैं। दिल्ली की समृद्धि से भारत की समृद्धि का पता चलता है।

मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध-My Aim In Life Essay In Hindi

मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध (My Aim In Life Essay In Hindi) :

भूमिका : मनुष्य का महत्वकांक्षी होना एक स्वभाविक गुण होता है। हर व्यक्ति जीवन में कुछ विशेष प्राप्त करने की इच्छा रखता है। मनुष्य अनेक प्रकार की कल्पनाएँ करता है। वह खुद को ऊपर उठाने के लिए योजनाएँ बनाता है। कल्पना तो सबके पास होती हैं लेकिन कल्पना को साकार करने की शक्ति केवल किसी-किसी के पास ही होती है। सपनों में तो सभी घूमते हैं।

सभी लोग महत्वकांक्षाओं के मोती प्राप्त करना चाहते हैं। मनुष्य कभी भी बिना उद्देश्य के कोई काम नहीं करता है मनुष्य का हर कार्य सोद्देश्य पूर्ण होता है। एक मनुष्य भी बिना उद्देश्य के कोई काम नहीं करता है। कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को सामने रखकर ही कार्य करता है। हमारा जीवन एक यात्रा की तरह होता है।

अगर यात्री को पता होता है कि उसे कहाँ पर जाना है तो वह अपने लक्ष्य की तरफ बढना शुरू कर देता है लेकिन जब यात्री को अपने लक्ष्य का ही पता नहीं होता है तो उसकी यात्रा निरर्थक हो जाती है। उसी तरह यदि एक विद्यार्थी को पता होता है कि उसे क्या बनना है तो वह उसी दिशा में प्रयत्न करना शुरू कर देता है और अपने लक्ष्य में सफल भी हो जाता है। जब एक विद्यार्थी का कोई उद्देश्य ही नहीं होता है तो उसका जीवन उसको कहीं पर भी नहीं ले जाता है।

बाल्यावस्था की समस्या : जब बच्चा छोटा होता है तो वह विद्यालय में प्रवेश करता है। उस समय में बच्चों के सामने अनेक लक्ष्य होते हैं। वह जैसे-जैसे लोगों के संपर्क में आता है वैसे-वैसे उस पर प्रभाव पड़ता है। कभी तो वह सोचने लगता है कि वह डॉक्टर बनेगा और कभी वह सोचने लगता है कि वह अध्यापक बनेगा और कभी इंजीनियर बनेगा।

अलग-अलग लोगों के लक्ष्य भी अलग-अलग होते हैं। कभी वह डॉक्टर बनकर रोगियों की सेवा करना चाहता है, कभी इंजीनियर बनकर इमारतें बनाना चाहता है, कभी नेता बनकर देश की सेवा करना चाहता है, कभी सैनिक बनकर देश की रक्षा करना चाहता है।

माँ-बाप भी यह कल्पना करते हैं कि वे अपने बच्चे को यह बनायेंगे, वह बनायेंगे लेकिन वास्तव में निर्णय तो बच्चों को खुद ही लेना पड़ता है। माँ-बाप को बच्चों पर अपनी मर्जी नहीं थोपनी चाहिए। विद्यार्थीकाल मनुष्य के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह मानव जीवन की आधारशिला के बराबर होता है।

यदि विद्यार्थी इस काल में अपने जीवन के लक्ष्य को निर्धारित कर लेते हैं तो वे जीवन को सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण बना लेता है और अपने देश और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होता है। सभी लोगों की इच्छाएं अलग-अलग होती हैं लेकिन कुछ ही लोगों की इच्छाएं साकार हो पाती हैं।

डॉक्टर बनने का उद्देश्य : मैं अक्सर अपने दोस्तों को बात करते हुए सुनता हूँ की वे क्या बनना चाहते हैं लेकिन मैंने तो पहले से ही अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। मेरा जीवन में एक ही लक्ष्य है कि मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनूंगा। मैं डॉक्टर बनकर देश और समाज की रोगों से रक्षा करूंगा।

कुछ विद्यार्थी डॉक्टर इसलिए बनना चाहते हैं जिससे वे अधिक-से-अधिक धन कमा सकें लेकिन मेरा उद्देश्य यह नहीं है। मैं डॉक्टर बनकर गरीबों और पीड़ितों की सेवा करना चाहता हूँ। कुछ लोग अपने उद्देश्य को पाकर भी गलत रास्ते पर चल देते हैं वे अपने कर्तव्य को अच्छी तरह नहीं निभाते हैं।

मैं अपने लक्ष्य पर पहुंचने के बाद अपने कर्तव्य से नहीं भटकूँगा। मैं ऐसा चिकित्सा ज्ञान प्राप्त करना चाहता जिसे लोग पैसा के अभाव की वजह से प्राप्त नहीं कर पाते हैं। मैं डॉक्टर इसलिए बनना चाहता हूँ जिससे मैं गरीब लोगों की रोगों से रक्षा कर सकूं।

मैं उन्हें स्वस्थ रहने के लिए अनेक प्रकार के तरीके बताऊंगा जैसे- वे किस प्रकार जीवन-यापन करें, स्वास्थ्य और संतुलित भोजन के महत्व को समझें, किस प्रकार रोगों से खुद की रक्षा करें इन सब में मैं अपना पूरा योगदान दूंगा। मैं डॉक्टर बनकर अपने देश और समाज की सेवा करना चाहता हूँ।

शिक्षकों एवं डॉक्टर का महत्व : प्राचीनकाल के धार्मिक ग्रंथ भी घोषणा करते हैं कि दो वर्ग के मनुष्यों का समाज पर बहुत ज्यादा उपकार है। पहला वर्ग शिक्षकों का है जो लोगों के अंदर से अज्ञान को निकालकर ज्ञान का दीपक जलाकर उनके जीवन को सार्थक कर देते हैं।

दूसरा वर्ग डॉक्टर या चिकित्सक का होता है जो रोगी के रोगों को दूर करके उसे नया जीवन देता है। शिक्षा देना और रोगियों का इलाज करना दोनों ही पवित्र काम होते हैं और मैंने अपने जीवन के लक्ष्य के लिए इनमें से एक पवित्र लक्ष्य को चुन लिया है।

हमारे देश में जितने भी लोग डॉक्टरी की परीक्षा में पास होते हैं वे नगरों या शहरों में अपने अलग क्लीनिक खोल लेते हैं और धन जमा करना शुरू कर देते हैं और विदेशों की तरफ भागते है। ऐसे डॉक्टर कभी भी समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को नहीं समझते हैं।

वे अपना लक्ष्य सिर्फ धन कमाना मानते हैं। आज के समय में नगरों में ऐसे असंख्य नर्सिंग होम खुल चुके हैं। यहाँ पर जो डॉक्टर काम करते हैं वे मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। यह अपने देश और देश में रहने वाले निवासियों के साथ विश्वासघात है।

ग्रामीणों के उपचार की आवश्यकता : मैं दूसरे लोगों की तरह नगर में क्लीनिक न खोलकर नगर से दूर गाँव में एक छोटा सा अस्पताल स्थापित करूं जिससे गाँव के लोगों को रोगों से बचने और रोग से मुक्त होने की सुविधा मिल सके। मैं रोगियों से पैसे लूटने की जगह उनसे केवल उतने ही पैसे लूँगा जिससे अस्पताल सुचारू रूप से चल सके।

जो लोग गरीब और अभावग्रस्त होंगे उनका इलाज मैं मुफ्त में करूंगा। मैं भी एक गाँव का रहने वाला हूँ। मैंने कई बार गाँव के लोगों को दवा और इलाज के अभाव की वजह से मरते हुए देखा है और देख रहा हूँ। मैं डॉक्टर बनकर उन लोगों की सेवा करना चाहता हूँ जो न ही तो बड़े डॉक्टर को मोटी फीस दे सकते हैं और न ही मरीज को बड़े नगरों में ले जा सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की अधिक-से-अधिक जरूरत है। हम अक्सर रेडियो, समाचार पत्र और अखबारों में पढ़ते हैं कि हर साल हजारों लोग कुपोषण का शिकार हो रहे है और उन्हें ठीक इलाज न मिलने की वजह से उनकी मौत हो जाती है इस बात को पढकर बहुत दुःख होता है।

उद्देश्य पूर्ति के लिए प्रयत्न : मैं यह बात अच्छी तरह से जानता हूँ कि एक सफल डॉक्टर बनना आसान नहीं है इसके लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। डॉक्टर के ह्रदय में मरीजों के प्रति दया, करुणा, और सहानुभूति की भावना होना बहुत ही जरूरी होता है। मैंने अपने इस उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए अभी से प्रयास करने शुरू कर दिए हैं।

मेरे माता-पिता का आशिर्वाद सदैव मेरे साथ है। उनका भी सपना है कि मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनूँ। मैं डॉक्टर बनकर सही अर्थों में उन लोगों को पाठ पढ़ाना चाहता हूँ जो लोगों से पैसे कमाने के लिए डॉक्टर बनते हैं। मैं किसी ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे नर्सिंग होम की स्थापना करना चाहता हूँ जिसमें गरीब और अभावग्रस्त लोगों का उचित फीस पर इलाज कर सकूं।

आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत जरूरत है। यह काम भारत सरकार कर रही है लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं। मैं अपने उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए बहुत कठिन परिश्रम करूंगा। मैं जब तक डॉक्टर नहीं बन जाता तब तक चैन से नहीं बैठूँगा।

उपसंहार : मेरी यह इच्छा है कि मैं अपने लक्ष्य को पूरा करूं। मैं इस काम को पूरा करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ समाज-सेवा संस्थाओं का भी सहयोग लूँगा। मैं कोशिश करूंगा कि गाँव में स्थित मेरा नर्सिंग होम गाँव के लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकें।

मुझे पता है कि यह काम इतना आसान नहीं है लेकिन मेरे दृढ निश्चय और संकल्प से सभी काम संभव हो सकते हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि वे मेरी लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करें। मुझे विश्वास है कि मेरे डॉक्टर बनने के लक्ष्य में गुरुजन, सहपाठी और मेरे माता-पिता मेरा साथ जरुर देंगे। मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन-से-कठिन परिश्रम करूंगा।

हमारा प्यारा भारत वर्ष पर निबंध-Mera Pyara Bharat Varsh Essay In Hindi

हमारा प्यारा भारत वर्ष पर निबंध (Mera Pyara Bharat Varsh Essay In Hindi) :

भूमिका : भारत सिर्फ एक शब्द नहीं है यह हर भारतीय के दिल की आवाज है। भारत एक देश है जहाँ पर हम सभी इसकी छत्रछाया में रहते हैं। राष्ट्र ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति होती है। भारत को हर भारतीय अपनी माँ मानता है। जिस भूमि के अन्न-जल से मनुष्य का शरीर बनता है, विकसित होता है, राष्ट्र के लिए उसका अनायास प्रेम और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और लगाव उत्पन्न हो जाता है।

सभी प्राणी अपनी जन्मभूमि से प्यार करते हैं और जिससे प्यार किया जाता है उसकी हर चीज में सौंदर्य दिखाई देता है। उसकी हर वस्तु प्रिय लगने लगती है। हमें भी अपने भारत से बहुत प्यार है और यहाँ की हर चीज में सुंदरता दिखाई देती है। हमारा भारत इतना पवित्र और गरिमामय है कि भगवान भी यहाँ पर जन्म लेने के लिए लालायित रहते हैं।

हमारी जन्म भूमि भारत स्वर्ग से भी बढकर है। यहाँ पर बहुत से ऐसे स्थल है जो भारत के सबसे अधिक सुंदर स्थलों में गिने जाते हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत ने सातवाँ स्थान प्राप्त किया है और जनसंख्या में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। हमारा भारत दुनिया के विकासशील देशों में से एक है। हमारा भारत बहुत ही तेज गति से विकास की ओर अग्रसर हो रहा है।

देश का नामकरण : देश का नाम भारत या भारत वर्ष है। हमारे देश भारत का नाम सूर्यवंशी राजा भरत के नाम पर पड़ा था। प्राचीनकाल में भारत का नाम आर्यावर्त और जगतगुरु था। कुछ विद्वानों का मानना है कि दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर ही देश का नाम भारत पड़ा था। भारत को हिंदुस्तान भी कहा जाता है। अंग्रेजी में भारत को इंडिया कहा जाता है।

पहले इसे सोने की चिड़िया भी कहा जाता था। मेरा भारत सब देशों में शिरोमणि है। हमारा भारत उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पश्चिम में गुजरात से लेकर पूर्व में असम तक भारत फैला हुआ है। ये सब भारत को प्रभावशाली बनाते हैं। भारत की देह को प्रकृति ने एक दैवी का नाम दिया है। बर्फ से ढका हुआ हिमालय हमारे भारत के सिर पर मुकुट के बराबर है।

दक्षिण दिशा में इसके कदम हैं जिन्हें हिन्द महासागर हमेशा धोता रहता है। इसकी बाहें दूर-दूर तक फैली हुई हैं। भारत वह देश है जहाँ पर सिंधु घाटी की नगरीय सभ्यता का विकास हुआ था। भारत वह भूमि है जहाँ पर हिंदू संस्कृति फली-फूली और वेदों की रचनाएँ की गयीं हैं। इसी भूमि पर धर्म ने अपनी उंचाईयों को छुआ था।

देश का प्राचीन इतिहास : हमारा भारत बहुत प्राचीन देश है। हमारे भारत का इतिहास स्वर्णिम रहा है। ऐसा भी एक समय था जब इसे सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत देश धन और सौंदर्य से वषिभुत हुआ करता था। भारत ने ही ज्ञान की किरण पूरे संसार में फैलाई थी। ज्ञान के क्षेत्र में पूरा विश्व भारत का ऋणी है। इसी पर तो विज्ञान का ढांचा टिका हुआ है।

ज्ञान का भंडार होने की वजह से ही भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत पर मुगलों और अंग्रेजों ने अपना राज्य स्थापित किया था और इसे लूटा था। हमारे देश ने हजारों वर्षों तक गुलामी की थी। भारत में अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया था जिन्होंने देश को सत्य और अहिंसा से परिचित कराया था। लेकिन हमारे वीर योद्धा और क्रांतिकारियों ने मिलकर भारत को 15 अगस्त, 1947 को आजाद करा लिया था जिसकी वजह से आज के समय में हमारा देश उन्नत और शक्तिशाली बनता जा रहा है।

भारत ने कई आक्रमणों को झेला लेकिन भारत रहा है और आगे भी रहेगा। भारत की कहानी भावनाओं से ओत-प्रोत है। इस भारत ने केवल कृष्ण को ही जन्म नहीं दिया था बल्कि इसने ऐसे अनेक महापुरुषों को जन्म दिया था जो हमेशा के लिए अमर हो गये हैं। दक्षिण भारत का एक भाग पठारी है। संकीर्ण जातिगत भावनाएँ मिटा दी गई और जनता का शासन शुरू हो गया। लोकतंत्र से भारत को बहुत लाभ हुआ था।

भारत विविधताओं का देश : हमारा भारत विविधताओं का देश है। भारत में विभिन्नता में एकता दिखाई देती है। भारत में अनेक राज्य हैं और हर राज्यों से अलग-अलग संस्कृतियाँ जुडी हुई हैं। हमारे देश में पहाड़ियाँ हैं तो समुद्र भी हैं, हरियाली है तो रेगिस्तान भी हैं। हमारे भारत में गर्मी, सर्दी, बसंत, पतझड़ सभी ऋतुएं आती हैं।

यहाँ पर हर धर्म के लोग मिलजुलकर रहते हैं। हमारे भारत में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर भी बने हुए हैं। हमारे भारत में अनेक भाषाएँ बोलने वाले लोग रहते हैं। यहाँ पर खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा,धर्म और विचारों में विविधता है। हमारे भारत के लोग एक परिवार की तरह रहते हैं और ‘वसुधैव कटुम्बकम्’ की भावना में विश्वास रखते हैं।

भारत की यह विविधता ही हमारे देश की शान और उन्नति का कारण है। भारत में तरह-तरह के त्यौहार मनाये जाते हैं। यहं पर सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार प्राप्त हैं। सभी धर्मों को समान नजरों से देखा जाता है। यहाँ पर धर्मों के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता है। हमारा भारत अन्न, फल, सब्जी, दालों से किसान ही देश के वासियों को पालता है।

इसे देश के किसानों की पूजा कर्म होता है। रत्न और हीरों की खाने, कोयले के भंडार, लोहा और युरेनियम धातुओं की गुफा हमारे भारत की मिटटी के नीचे छिपी हुई हैं। हमारे भारत देश से ही बहुत से देश कपड़ा, कल-पुर्जों का निर्यात करते हैं। हमारा भारत एशिया महाद्वीप में तीन ओर से पानी से घिरा हुआ है। भारत विश्व की बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति बन गई है।

आज भारत की विकास दर तेजी से बढ़ रही है। हमारे देश की सेनाएँ देश की रक्षा करने में संगलन है। स्वतंत्रता मिलने के बाद हिंदी को देश की राष्ट्र भाषा बनाया गया है। आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया था और हमारा देश गणतंत्र हुआ था।

प्राकृतिक सौंदर्य : भारत का सौंदर्य ऐसा है जो सबको अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ पर कश्मीर का नजारा स्वर्ग की तरह का होता है और केरल की हरियाली मन को आनंद देती है और मन मोह लेती है। यहाँ पर सही ऋतुएँ समय पर आती हैं और धरती को अपनी अनूठी छटाओं से सजाती हैं।

भारत का स्वरूप जितना विशाल और भव्य है उसका मन उतना ही उन्नत और उदार है। भारत में कश्मीर स्वर्ग की तरह सुंदर लगता है। भारत में ऐसे दृश्यनीय स्थल हैं जिससे प्रकृति की सुंदरता में चार-चाँद लग जाते हैं। उनकी सुंदरता से प्रकृति बहुत ही सुंदर लगती है। भारत के राष्ट्रीय पक्षी और पशु भारत को बहुत ही सुंदर बनाते हैं। जब पक्षियों की आवाजें सुबह-सुबह सुनाई देती हैं तो ऐसा लगता है जैसे प्रकृति गा रही हो।

मिट्टी से बहुत ही अच्छी सुगंध आती है जो मन को मोह लेती है। हमारे देश की जन और देश की संस्कृति बहुत ही अनोखी है। भारत के अनेक प्रकार के फूलों से प्रकृति सुगंधित हो उठती है। भारत की जलवायु उष्ण है इसी वजह से प्रकृति में नमी छाई रहती है। प्राचीन समय में सब कुछ संतुलित था और लोग खुश थे। कृषि के क्षेत्र में प्रगति हो रही है।

उपसंहार : आज के समय में भारत हर क्षेत्र में आत्म-निर्भर हो गया है। देश के उद्योग धंधों में जाल सा बिछा हुआ है और भारत को विश्व में विकासशील देश में अग्रणी स्थान प्राप्त हैं। लेकिन दुर्भाग्य से हर क्षेत्र में संपन्नता होने के बाद भी भारत का वर्तमान बहुत निराशा से भरा हुआ है। आज के समय में भारत में धर्म, जाति के नाम पर झगड़े होते रहते हैं।

भ्रष्टाचार ने अपने चारों तरफ पाँव फैला लिए हैं। आज महंगाई आसमान को छू रही है। इस तरह मेरा भारत अनेक तरह की परेशानियों से घिरा हुआ है। भारत के प्रति हमारा कर्तव्य है कि इन परेशानियों को दूर करने में अपना योगदान दें। इससे देश अपना गौरव फिर से प्राप्त कर सकेगा।

भारत में जनसंख्या की समस्या बढती ही जा रही है इसमें मनुष्य को भारत को अपना योगदान देना चाहिए। कुछ लोग भारत के संविधान का गलत फायदा उठा रहे हैं। वे लोग भारत की पुरानी मान्यताओं और संस्कृति पर वार करते जा रहे हैं। लोगों को इन समस्याओं को समझाना होगा। लोगों को देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।