वृक्षारोपण पर निबंध-Essay on Afforestation in hindi

वृक्षारोपण पर निबंध :

भूमिका : भूतकाल में मनुष्य की वस्त्र, भोजन, और आवास सभी जरूरत वृक्षों से ही पूरी होती थी। फल उसके भोजन, पत्ते और छाल उसके कपड़े और लकड़ी तथा पत्तियों से बनी झोंपड़ी उसका घर होती थी। आग लगाने का पता चलने पर उसने उष्ण भी वृक्षों से ही प्राप्त किया था। आज के समय में भी वृक्ष मनुष्य के जीवन का आधार हैं। वृक्षों से ही हमे फलों और फूलों की प्राप्ति होती है। बहुत प्रकार की जड़ी-बूटियां भी हमें वृक्षों से ही प्राप्त होती है।

प्रकृति की पूजा : वन महोत्सव से हमारे मन में प्रकृति की पूजा का भाव उत्पन्न होता है। इस दृष्टि से देखा जाये तो छोटे पौधों का भी उतना ही महत्व होता है जितना बड़े पौधों का होता है। छोटे पौधे बड़े होकर बड़े पौधों की जगह ले लेते हैं। वन हमारे प्रेरणा के स्त्रोत होते हैं। वन से हमे रोगों के इलाज के लिए दवाईयाँ मिलती हैं। वन प्रकृति की देन हैं इसलिए हमें प्रकृति की पूजा करनी चाहिए। बेल, तुलसी, केला, बड और पीपल की पूजा की जाती है।

मानव का जीवन : वन मानव जीवन के लिए निधि होते हैं। लेकिन जनसंख्या के बढने से वन काट दिए गये और धरती रहने और कृषि करने के योग्य बना दी गई। भारत में बहुत घने वन थे लेकिन धीरे-धीरे वनों का नाश भयंकर रूप से होने लगा। नए पेड़ लगाना संभव नहीं किया गया। स्वतंत्रता के बाद वनों की ओर ध्यान दिया गया है और देश में वन महोत्सव को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाने लगता है।

इस उत्सव को सारे संसार में बहुत ही खुशी से मनाया जाने लगा। हर जगह पर कोई एक बड़ा आदमी पेड़ लगाता है और दूसरे लोग उसका अनुसरण करते हैं। वृक्ष हमारे लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं जब तप्ती दोपहर होती है तब हम वृक्ष की छाया में बैठते हैं। वृक्षों से मानव जीवन में ईंधन, वनस्पतियों और फल-फूलों की जरूरत पूरी होती हैं। आदिकाल से ही वृक्ष मनुष्य की जरूरतों को पूरा करते आ रहे हैं।

वृक्ष हमारे मित्र : मानव और वनों को मित्र कहा जाता है। इनके लाभों को गिनना असंभव है। वृक्ष जहर कार्बन-डाई-आक्साईड को लेकर हमे जीने के लिए ऑक्सीजन देते हैं। वृक्ष अपने लिए भोजन बनाते हैं लेकिन फल के रूप में हमें दे देते हैं। इनके घने कुंज वन्य जीवन को रहने के लिए जगह और सुरक्षा देते हैं। ये हमारे बहुत ही सच्चे मित्र होते हैं। वृक्ष खुद तप्ती धूप को सहकर हमे छाया देते हैं।

धरती का सौंदर्य : वृक्षों को धरती का सौंदर्य माना जाता है। पूरी धरती पर हरियाली होने की वजह से ही धरती रंग-बिरंगी दिखाई देती है। हरी-हरी घास वाले पहाड़ी क्षेत्र और हर मौसम में खिलने वाले फूल ही हमारा मन मोह लेते हैं। घने जंगलों की हरियाली को देखकर ह्रदय खुशी से भर जाता है।

मन में शांति और सुख का अनुभव होता है। वृक्ष वर्षा करने में सहायता करते हैं। अगर धरती पर नमी न हो तो धरती रेगिस्तान में बदल जाएगी। पूरा प्राणी और पशु जगत इन्हीं वृक्षों और वनस्पतियों पर आश्रित हैं। वृक्षों के बिना धरती की दशा का हम किसी मरुस्थलीय देश को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। बाढ़ को रोकने में भी वृक्ष हमारी सहायता करते हैं। ये धरती की जीवन रक्षा करते हैं।

हवा की शुद्धि : जब अनेक वैज्ञानिक खोजें की गईं तब हमें यह पता चला कि वृक्ष और वनस्पतियाँ हवा को शुद्ध करती हैं। ये वर्षा करने में सहायता करते हैं और वातावरण को भी संतुलित बनाए रखते हैं। साँस लेने के लिए या जिंदा रहने के लिए जिस ऑक्सीजन की जरूरत होती है वो हम सब को केवल वृक्षों से ही प्राप्त होती है। वृक्ष हमारे लिए ही वायु प्रदूषण की लड़ाई भी लड़ते है।

वन क्षरण : आजकल लोग भविष्य की चिंता किये बिना ही वनों को लगातार काटते जा रहे हैं। आच्छादित भूमि पर से वनों को काटकर नगर और शहर बसाए जा रहे हैं और उद्योग धंधों की स्थापना की जा रही है। ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए तथा घरेलू उपकरण और कृषि के लिए लोग वनों को अंधाधुंध काटे जा रहे हैं।

दूसरे देशों के मुकाबले हमारे भारत में वनों के साथ उपेक्षा का व्यवहार किया जाता है। जनसंख्या बढती जा रही है और वनों की संख्या बहुत ही कम होती जा रही है। हम वृक्षों का विकास किये बिना हम उनसे अधिक-से-अधिक वनस्पति प्राप्त कैसे कर सकते हैं।

उपसंहार : वृक्षों के महत्व से कोई भी इंकार नहीं कर सकता है। अब हर गाँव में पेड़ लगाए जा रहे हैं। हमारे देश के लोग भी वृक्षों के संदर्भ में अपने कर्तव्य से अवगत हो रहे हैं। वे वृक्षों के विकास के लिए प्रयत्नशील हैं।

हर साल वन महोत्सव बनाया जाता है और वृक्षारोपण का काम किया जाता है। हमें भी अधिक-से-अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए और स्वास्थ्य के उपहार को वृक्षों से प्राप्त करना चाहिए। हम वृक्षों को बचाकर धरती को सुंदर, हर भरा और जीवन योग्य बना सकते हैं।

चिड़ियाघर की सैर पर निबंध-Essay for Kids on Zoo in Hindi

चिड़िया घर की सैर पर निबंध :

भूमिका : परीक्षाओं के खत्म होने के बाद मोहन को बहुत खाली समय मिलने वाला था। उसके मन में पुस्तकालय से पुस्तकें लाने की इच्छा थी लेकिन तभी रायपुर से उसके मामा जी आ गये। बात करते हुए उसके मामा जी ने उससे पूंछा की- तुमने चिड़िया घर देखा है ? मोहन ने कहा एक बार दिल्ली का चिड़िया घर देखा था लेकिन मुंबई का चिड़िया घर नहीं देख पाया हूँ।

चिड़िया घर जाना : दूसरे दिन मामा जी और मैं हम दोनों बस में बैठकर चिड़िया घर के लिए रवाना हुए। चिड़िया घर जाते समय हमने बस के अंदर से बहुत ही मनोभव दृश्य का आनंद लिया। वहाँ पर मेरा एक दोस्त भी बना और वह हमारे साथ बहुत दूर तक गया था। मैं और मामा जी चिड़िया घर के गेट पर उतर गये। दोनों ने चिड़िया घर से टिकट ली और अंदर चले गये।

विभिन्न पक्षियों और पशुओं को देखना : हमें वहाँ पर पक्षियों के लिए बड़े पिंजरे से बने हुए स्थान मिले। कई पक्षियों को मोहन पहचानता था लेकिन कई ऐसे पक्षी थे जिन्हें मोहन नहीं पहचानता था उन सभी के नाम बाहर लिखे हुए थे। पिंजरे के बाहर उनके जीव विज्ञानी नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखे थे। वहाँ पर नाम के दो हिस्से थे- एक पक्षिकुल का और दूसरे उसकी उपजाति के थे।

पक्षी के लोक प्रचलित नाम भी आखिर में दिए हुए थे। पक्षी की आदतें और वह कहाँ पर पाया जाता है ये सब जानकारी वहाँ पर दी गई थी। हंसों के लिए खुला हुआ बाड़ा बना हुआ था। ये जल में रहने वाले पक्षी होते हैं इसी वजह से बाड़े में तालाब भी बनाया गया था। इनको आसानी से विचरण करने के लिए ही बाड़ा ऊपर से खुला बनाया गया है। कहीं-कहीं पर पेड़ भी लगे थे।

पानी में सफेद रंग की बतख और हंस तैर रहे थे। हिरनों के लिए भी बाड़ा बनाया गया था। उसके साथ वाले बाड़े में कंगारू था। कंगारू के पेट पर विचित्र तरह की थैली बनी हुई थी जिसमें उसका बच्चा बैठा हुआ था। आगे वाले बाड़े में बनैले सूअर के लिए काफी गहराई में तालाब बना हुआ था। बनैला सूअर बहुत ही फुर्तीला होता है। पास ही में सफेद भालू का बाड़ा बना हुआ था। उसके बाड़े को जंगल की तरह बनाया गया था।

शेर को देखना : अचानक से बहुत तेज दहाड़ सुनाई दी। सभी दर्शक चारों ओर देखने लगे। लोगों ने पास वाले बाड़े में जाकर देखा लेकिन वहाँ पर शेर नहीं था। उसके बाड़े के सींखचे दोहरे और ऊँचे थे। शेर झाड़ियों के पीछे भूख से टहल रहा था। उसके लिए कृत्रिम जलाशय बनाया गया था। जिससे एक पगडंडी ऊपर चढकर जंगल से मिल जाती है।

शेर के लिए बने पिंजरे के ऊपर चिड़ियाघर का एक कर्मचारी दिखाई दिया। वह शेर के लिए भोजन लाया था। शेर के लिए मांस के बड़े-बड़े टुकड़े लाये गये थे। वह भोजन को देखकर जल्दी से बाहर आ गया। उसने पिंजरे पर चढकर अंदर वाले फाटक को ऊपर की ओर खोला और पिंजरा कृत्रिम जंगल से जुड़ गया। शेर मांस की गंध से मांस के पास पहुंच गया और मांस पर टूट पड़ा।

उपसंहार : मामाजी ने घड़ी देखी। दोपहर हो रही थी। उन लोगों ने तीन बजे घर वापस जाने का निर्णय किया था। वे समय पर घर पहुंचने के लिए बाकी के पशु पक्षियों को जल्दी-जल्दी देखने लगे। चीता, तेंदुआ, हाथी, जेबरा, जिराफ को देखते-देखते हमें दो बज गये। फिर हम लोग जल्दी से घर के लिए निकल पड़े।

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध :

भूमिका : आजकल लोग प्राचीन तरीकों को बहुत ही कम अपनाते है वे प्राचीन तरीकों को अपनाने की जगह पर आधुनिक तरीकों को अधिक अपनाते हैं। पुराने तरीकों में काम बहुत ही समय में होता है लेकिन आधुनिक तरीकों से काम बहुत ही जल्दी हो जाता है।

ई-कॉमर्स का अर्थ : ई कॉमर्स का अर्थ होता है इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स या हम कह सकते हैं इंटरनेट द्वारा व्यापार करना। आज के समय में इटरनेट के व्यापार में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है। सन् 1998 में इस मिडिया से 43 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। यह आज तक बहुत उन्नति कर रहा है।

ई-कॉमर्स का प्रारंभ : भारत में ई कॉमर्स अभी अधिक लोकप्रिय नहीं हुआ है लेकिन ऐसी आशा की जा रही है कि यह बहुत जल्दी लोकप्रिय हो जायेगा। अभी कुछ दिनों पहले हिमाचल में इंटरनेट के द्वारा एक तर्क सेब बेचा गया था। सुनील मेहता ने इस प्रकार का पहला विक्रय किया था।

इंटरनेट पर ऐसी नीलामी बैंगलोर की एक फर्म संजीवनी इंफाटेक ने की और खरीददारी चेन्नई के अमीर-उल-हसन ने की थी। कंपनी ने ये नीलामी फर्मारबजारा.कॉम वेबसाइट से की थी। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे आगे चलकर ई-कॉमर्स से व्यापार में बहुत वृद्धि होगी।

ई-कॉमर्स से कार्यप्रणाली : इंटरनेट से व्यापार प्रणाली बहुत ही सरल होती है। अगर कोई व्यापारी कुछ खरीदना चाहता है तो वह वेब पेज से व्यापारी के इलेक्ट्रोनिक स्टोर में से उत्पादों को चुन लेता है। उस समय वह आर्डरफार्म को भर देता है। इसमें उत्पादों के साथ-साथ चीजों की कीमत भी दी जाती है।

जब वे चीजों का चुनाव कर लेते है तो साईट में हरकत होती है और वो खरीददार के अकाउंट को सूचना देते है। साईट को खरीदने वाले और बेचने वाले की सुरक्षा और प्रामाणिकता का मापदंड होता है। ये संदेश को सुरक्षित भेजने के लिए गुप्त संदेश की विधि को अपनाता है।

जब बेचने वाले को आर्डर मिल जाता है तो वह खरीददार के बैंक को कीमत देने के लिए इजाजत दे देता है। जब उसे इसकी स्वीकृति मिल जाती है तो वह कार्डहोल्डर को इसकी पुष्टि की खबर देने के बाद माल भेज देता है।

ई-कॉमर्स के लाभ : इस प्रिक्रिया को करने के बाद बेचने वाला खरीददार के बैंक को वास्तविक मूल्य की अदायगी का अनुरोध करता है। अंततः खरीददार के बैंक से धन राशि को बेचने वाले के बैंक में ट्रांफर कर देता है। व्यापार की इस प्रणाली से व्यापरी और ग्राहक का सीधा संपर्क हो जाता है।

इस प्रणाली में बिचौलियों को कमीशन नहीं देना पड़ता है। व्यापार का क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और बिक्री से फायदा ज्यादा होता है। व्यापार प्रक्रिया को मिनटों में पूरा किया जाता है। इसके साथ-साथ पैसे की अदायगी भी पूरी हो जाती है। इसमें समय की बचत होती है।

घर पर बैठे व्यक्ति के सामने पूरा बाजार स्क्रीन पर आ जाता है और उसे खरीदने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता है। इस प्रक्रिया से जो माल खरीदा जाता है वो विश्वसनीय होता है। अगर इसमें कोई समस्या हुई तो बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों ही सीधे बात करके समस्या का कोई न कोई हल ढूँढ लेते हैं।

उपसंहार : ई कॉमर्स के संचालन के लिए विशेष प्रकार के प्रशिक्षण की जरूरत होती है। आज के युवा के लिए इस क्षेत्र में काम के बहुत अधिक अवसर हैं। इसी लिए युवा ई-कॉमर्स में प्रशिक्षण प्राप्त करके अपना करियर बना सकते हैं।

मुंशी प्रेमचंद पर निबंध-Munshi Premchand Par Nibandh

मुंशी प्रेमचंद पर निबंध :

भूमिका : हमारे हिंदी साहित्य को उन्नत बनाने के लिए अनेक कलाकारों ने योगदान दिया है। हर कलाकार का अपना महत्व होता है लेकिन प्रेमचंद जैसा कलाकार किसी भी देश को बड़े सौभाग्य से मिलता है। अगर उन्हें भारत का गोर्की कहा जाये तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। मुंशी प्रेमचंद जी के लोक जीवन के व्यापक चित्रण और सामाजिक समस्याओं के गहन विश्लेषण को देखकर कहा जाता हैं कि प्रेमचंद जी के उपन्यासों में भारतीय जीवन के मुंह बोलते हुए चित्र मिलते हैं।

प्रिय लेखक : मुंशी प्रेमचंद जी हमारे प्रिय लेखक हैं। प्रेमचंद जी ने एक दर्जन उच्चकोटि के उपन्यास लिखें हैं और तीन सौ से भी अधिक कहानियाँ लिखकर हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाया है। बहुत से उपन्यासों में गोदान, कर्म भूमि और सेवासदन सभी प्रसिद्ध हैं। कहानियों में पूस की रात और कफन बहुत ही मार्मिक हैं। उनकी कहानियाँ जन जीवन का मुंह बोलता हुआ चित्र प्रस्तुत करते हैं।

प्रिय लगने का कारण : साहित्य में अशलीलता और नग्नता के वे कट्टर विरोधी हैं। प्रेमचंद जी का मानना है कि साहित्य समाज का चित्रण करता है लेकिन साथ ही समाज के आगे एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत करता है जिससे लोग अपने साहित्य समाज के लोग अपना चरित्र ऊँचा उठा सकते हैं। प्रेमचंद जी के उपन्यासों के अनेक पात्र होरी, धनिया, सोफी, निर्मला, जालपा सभी आज भी जीते जागते पात्र लगते हैं।

गरीबों के जीवन पर लिखने से उन्हें विशेष सफलता मिली है। प्रेमचंद जी की भाषा सरल है लेकिन मुहावरेदार है। भारत में हिंदी का प्रचार करने में प्रेमचंद के उपन्यासों ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिसे लोग समझते और जानते थे। इसी वजह से प्रेमचंद जी के अन्य लेखकों की तुलना में अधिक उपन्यास बिके थे।

परिचय : मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म माँ भारती में वाराणसी के समीप लमही गाँव में सन् 1880 ई० को हुआ था। उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए उनका बचपन बहुत ही कठिनाईयों से बीता था। बहुत ही मुश्किल से बी० ए० की और फिर शिक्षा विभाग में भी नौकरी की लेकिन उनकी स्वतंत्र विचारधारा की वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ दी। उन्होंने जो नवाब राय के नाम से पुस्तक लिखी थी उसे अंग्रेजों ने जब्त कर लिया था। इसके बाद उन्होंने प्रेमचंद के नाम से लिखना शुरू कर दिया।

साहित्य : प्रेमचंद जी को आदर्शवादी यथार्थवादी साहित्यकार कहा जाता है। गोदान को प्रेमचंद जी का ही नहीं बल्कि सारे संसार का सर्वोत्तम उपन्यास माना जाता है। गोदाम में जो कृषक का मर्मस्पर्शी चित्र दिया गया है उसके बारे में सोचकर आज भी मेरा दिल दहल जाता है। सूद-खोर बनिये, जागीरदार, सरकारी कर्मचारी सभी का भेद खोलकर प्रेमचंद जी ने अपने साहित्य को शोषित और दुखी लोगों का प्रवक्ता बना दिया है।

उपसंहार : यह बहुत ही खेद की बात है कि हिंदी के ये महान कलाकार उम्र भर आर्थिक समस्याओं से घिर रहा था। पूरी उम्र परिश्रम करने की वजह से स्वास्थ्य गिरने लगा और सन् 1936 में इनकी मृत्यु हो गई थी। उनका साहित्य भारतीय समाज में जीवन का दर्पण माना जाता है। उनके साहित्यिक आदर्श बहुत बड़ा मूल्य रखते हैं।

मेरी प्रिय पुस्तक रामचरित्रमानस पर निबंध

मेरी प्रिय पुस्तक रामचरित्रमानस पर निबंध :

भूमिका : महात्मा गाँधी में राम राज्य स्थापित करने की उच्च भावना को जगाने वाली प्रेरणा शक्ति को रामचरितमानस पुस्तक थी। इस पुस्तक को कवि तुलसीदास का अमर स्मारक माना जाता है। इसे तुलसीदास का ही नहीं बल्कि पूरी हिंदी साहित्य समृद्ध होकर समस्त जगत को अलोक देता रहता है। इसकी श्रेष्ठ का पता हमें इस बात से लग जाता है कि कृति संसार की सभी समृद्ध भाषओं में अनुदित हो चुकी है।

मेरी प्रिय पुस्तक : रामचरितमानस मेरी प्रिय पुस्तक है। रामचरितमानस को जीवन की अमूल्य निधि माना जाता है। इसमें कृति के मूल संदेश पत्नी का पति के प्रति, भाई का भाई के प्रति, बहु का सास-ससुर के प्रति, पुत्र का माता-पिता के प्रति कर्तव्यों के बारे में पता चलता है।

इसके अलावा ये हिंदी साहित्य का वो कुसुमित फूल है जिसकी सुगंध से तन-मन में एक अनोखा सुगंधि संचार होता है। ये ग्रंथ दोहा-चौपाई से लिखा हुआ एक महाकाव्य है। ग्रंथ में सात कांड होते हैं। इसमें बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, उत्तर कांड होते हैं।

हर एक कांड में भाषा और भाव की दृष्टि से पुष्ट और उत्कृष्ट है। हर एक कांड के शुरू में संस्कृत के श्लोक भी हैं। उसके बाद कला फलागम की ओर बढती है।

प्रिय लगने के कारण : यह ग्रंथ अवधि भाषा और दोहा-चौपाई से लिखा गया है। इस ग्रंथ की भाषा में प्रांजलता के साथ-साथ प्रवाह और सजीवता दोनों हैं। इसमें अलंकार स्वाभाविक रूप से आ रहे हैं इसलिए ये सौंदर्य प्रदत्त है। उनकी वजह से कथा का प्रवाह नहीं रुकता और स्वछंद रूप से बहता ही रहता है।

इसमें मुख्य रूप से रूपक और अनुप्रास अलंकार मिलते हैं। इसमें मुख्य दोहा और चौपाई छंद होते हैं। वर्णात्मक शैली होते हुए भी मार्मिक व्यंजना शक्ति का कहीं-कहीं पर रूप ले लेती है। इसमें सभी रसों का समावेश है। वीभत्स रस भी लंका में उभर कर आया है। इसमें जितना प्रभावशाली चरित्र चित्रण हुआ है उतना किसी हिंदी के महाकाव्य में नहीं हुआ है। इसमें बहुत से प्रशंसनीय और उल्लेखनीय चरित्र हैं राम, सीता, लक्ष्मण, दशरथ, रावण, भरत आये हैं।

पुस्तक की विशेषताएं : रामचरितमानस को पढने से परिवार और समाज की समस्याओं को दूर करने की प्रेरणा मिलती है। ऐसा करने से परलोक के साथ-साथ इस लोक के कल्याण का मार्ग दिखाई देता है और मन में शांति आती है। इसके एक बार पढने के बाद बार-बार पढने को मन करता है।

रामचरितमानस से हमारे सामने समंवय का दृष्टिकोण आता है। इसमें भक्ति और ज्ञान का, निराकार का, और साकार का समंवय मिलता है। कवि तुलसीदास जी ज्ञान और भक्ति में कोई भी भेद नहीं मानते थे। रामचरितमानस में धर्म और नीति का प्रशंसनीय उपदेश दिया गया है।

इसमें राम भक्ति का बहुत प्रभावी निरूपण और राम कथा का सरस और धार्मिक कीर्तन किसी और जगह मिलना बहुत ही कठिन है। इस ग्रंथ में जीवन का मार्मिक चित्र का विशद चित्रण किया गया है।

इसमें जीवन के हर रस का संचार किया गया है और लोक मंगल की उच्च भावना का समावेश किया गया है। यह ग्रंथ एक तरीके से पवित्र गंगा के समान है जिसमें डुबकी लगाने से शरीर में एक मधुर रस का संचार होता है। जो भक्त सह्रदय वाले होते हैं उनके लिए यह एक अमर वाणी की तरह है।

उपसंहार : दिए गये उपर्युक्त विवेचन से हम कह सकते हैं कि रामचरितमानस साहित्यिक और धार्मिक दृष्टि से उच्चकोटि की रचना है। यह अपनी उच्चता और भव्यता की कहानी खुद ही कहती है। इसी वजह से यह मेरी प्रिय पुस्तक है।