Ras In Hindi-रस की परिभाषा, भेद और उदाहरण

रस क्या होते हैं

रस का शाब्दिक अर्थ होता है – आनन्द। काव्य को पढ़ते या सुनते समय जो आनन्द मिलता है उसे रस कहते हैं। रस को काव्य की आत्मा माना जाता है। प्राचीन भारतीय वर्ष में रस का बहुत महत्वपूर्ण स्थान था। रस -संचार के बिना कोई भी प्रयोग सफल नहीं किया जा सकता था। रस के कारण कविता के पठन , श्रवण और नाटक के अभिनय से देखने वाले लोगों को आनन्द मिलता है।

रस के अंग :-

1. विभाव
2. अनुभाव
3. संचारी भाव
4. स्थायीभाव

1. विभाव :- जो व्यक्ति , पदार्थ, अन्य व्यक्ति के ह्रदय के भावों को जगाते हैं उन्हें विभाव कहते हैं। इनके आश्रय से रस प्रकट होता है यह कारण निमित्त अथवा हेतु कहलाते हैं। विशेष रूप से भावों को प्रकट करने वालों को विभाव रस कहते हैं। इन्हें कारण रूप भी कहते हैं।

स्थायी भाव के प्रकट होने का मुख्य कारण आलम्बन विभाव होता है। इसी की वजह से रस की स्थिति होती है। जब प्रकट हुए स्थायी भावों को और ज्यादा प्रबुद्ध , उदीप्त और उत्तेजित करने वाले कारणों को उद्दीपन विभाव कहते हैं।

आलंबन विभाव के पक्ष :-

1. आश्रयालंबन
2. विषयालंबन

1. आश्रयालंबन :- जिसके मन में भाव जगते हैं उसे आश्रयालंबन कहते हैं।

2. विषयालंबन :- जिसके लिए या जिस की वजह से मन में भाव जगें उसे विषयालंबन कहते हैं।

2. अनुभाव :- मनोगत भाव को व्यक्त करने के लिए शरीर विकार को अनुभाव कहते हैं। वाणी और अंगों के अभिनय द्वारा जिनसे अर्थ प्रकट होता है उन्हें अनुभाव कहते हैं। अनुभवों की कोई संख्या निश्चित नहीं हुई है।

जो आठ अनुभाव सहज और सात्विक विकारों के रूप में आते हैं उन्हें सात्विकभाव कहते हैं। ये अनायास सहजरूप से प्रकट होते हैं | इनकी संख्या आठ होती है।
1. स्तंभ
2. स्वेद
3. रोमांच
4. स्वर – भंग
5. कम्प
6. विवर्णता
7. अश्रु
8. प्रलय

3. संचारी भाव :- जो स्थानीय भावों के साथ संचरण करते हैं वे संचारी भाव कहते हैं। इससे स्थिति भाव की पुष्टि होती है। एक संचारी किसी स्थायी भाव के साथ नहीं रहता है इसलिए ये व्यभिचारी भाव भी कहलाते हैं। इनकी संख्या 33 मानी जाती है।
1. हर्ष
2. चिंता
3. गर्व
4. जड़ता
5. बिबोध
6. स्मृति
7. व्याधि
8. विशाद
9. शंका
10. उत्सुकता
11. आवेग
12. श्रम
13. मद
14. मरण
15. त्रास
16. असूया
17. उग्रता
18. निर्वेद
19. आलस्य
20. उन्माद
21. लज्जा
22. अमर्श
23. चपलता
24. धृति
25. निंद्रा
26. अवहित्था
27. ग्लानि
28. मोह
29. दीनता
30. मति
31. स्वप्न
32. अपस्मार
33. दैन्य
34. सन्त्रास
35. औत्सुक्य
36. चित्रा
37. वितर्क

4. स्थायीभाव :- काव्यचित्रित श्रृंगार रसों के मुलभुत के कारण स्थायीभाव कहलाते हैं। जो मुख्य भाव रसत्व को प्राप्त होते सकते हैं। रसरूप में जिसकी परिणति हो सकती है वे स्थायी होते हैं। स्थाईभावों की स्थिति काफी हद तक स्थायी रहती है। इसमें आठ रसों की स्थिति प्राप्त हो सकती है।

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रस के प्रकार :-

1. श्रृंगार रस
2. हास्य रस
3. रौद रस
4. करुण रस
5. वीर रस
6. अदुभत रस
7. वीभत्स रस
8. भयानक रस
9. शांत रस
10. वात्सल्य रस
11. भक्ति रस

तत्सम और तद्भव शब्द की परिभाषा,पहचानने के नियम और उदहारण-Tatsam Tadbhav

Hindi Grammer Ke Important Topics:

तत्सम शब्द (Tatsam Shabd) :

तत्सम दो शब्दों से मिलकर बना है – तत +सम , जिसका अर्थ होता है ज्यों का त्यों। जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। इनमें ध्वनि परिवर्तन नहीं होता है।

जैसे :- हिंदी , बांग्ला , मराठी , गुजराती , पंजाबी , तेलगु , कन्नड़ , मलयालम आदि।

तद्भव शब्द (Tadbhav Shabd) :

समय और परिस्थिति की वजह से तत्सम शब्दों में जो परिवर्तन हुए हैं उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।

तत्सम और तद्भव शब्दों को पहचानने के नियम :-

(1) तत्सम शब्दों के पीछे ‘ क्ष ‘ वर्ण का प्रयोग होता है और तद्भव शब्दों के पीछे ‘ ख ‘ या ‘ छ ‘ शब्द का प्रयोग होता है।

(2) तत्सम शब्दों में ‘ श्र ‘ का प्रयोग होता है और तद्भव शब्दों में ‘ स ‘ का प्रयोग हो जाता है।

(3) तत्सम शब्दों में ‘ श ‘ का प्रयोग होता है और तद्भव शब्दों में ‘ स ‘ का प्रयोग हो जाता है।

(4) तत्सम शब्दों में ‘ ष ‘ वर्ण का प्रयोग होता है।

(5) तत्सम शब्दों में ‘ ऋ ‘ की मात्रा का प्रयोग होता है।

(6) तत्सम शब्दों में ‘ र ‘ की मात्रा का प्रयोग होता है।

(7) तत्सम शब्दों में ‘ व ‘ का प्रयोग होता है और तद्भव शब्दों में ‘ ब ‘ का प्रयोग होता है।

तत्सम शब्द = तद्भव शब्द के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

अ, आ से शुरू होंने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

1. आम्र = आम
2. आश्चर्य = अचरज
3. अक्षि = आँख
4. अमूल्य = अमोल
5. अग्नि = आग
6. अँधेरा = अंधकार
7. अगम = अगम्य
8. आधा = अर्ध
9. अकस्मात = अचानक
10. आलस्य = आलस
11. अज्ञानी = अज्ञानी
12. अश्रु = आँसू
13. अक्षर = अच्छर
14. अंगरक्षक = अंगरखा
15. आश्रय = आसरा
16. आशीष = असीस
17. अशीति = अस्सी
18. ओष्ठ = ओंठ
19. आरात्रिका = आरती
20. अमृत = अमिय
21. अंध = अँधा
22. अर्द्ध = आधा
23. अन्न = अनाज
24. अनर्थ = अनाड़ी
25. अग्रणी = अगुवा
26. अक्षवाट = अखाडा
27. अंगुष्ठ = अंगूठा
28. अक्षोट = अखरोट
29. अट्टालिका = अटारी
30. अष्टादश = अठारह
31. अंक = आँक
32. अंगुली = ऊँगली
33. अंचल = आंचल
34. अंजलि = अँजुरी
35. अखिल = आखा
36. अगणित = अनगिनत
37. अद्य = आज
38. अम्लिका = इमली
39. अमावस्या = अमावस
40. अर्पण = अरपन
41. अन्यत्र = अनत
42. अनार्य = अनाड़ी
43. अज्ञान = अजान
44. आदित्यवार = इतवार
45. आभीर = अहेर
46. आम्रचूर्ण = अमचूर
47. आमलक = आँवला
48. आर्य = आरज
49. आश्रय = आसरा
50. आश्विन = आसोज
51. आभीर = अहेर

इ , ई से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

52. इक्षु = ईंख
53. ईर्ष्या = इरषा
54. इष्टिका = ईंट

उ , ऊ से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

55. उलूक = उल्लू
56. ऊँचा = उच्च
57. उज्ज्वल = उजला
58. उष्ट्र = ऊँट
59. उत्साह = उछाह
60. ऊपालम्भ = उलाहना
61. उदघाटन = उघाड़ना
62. उपवास = उपास
63. उच्छवास = उसास
64. उद्वर्तन = उबटन
65. उलूखल = ओखली
66. ऊषर = ऊँट

ए , ऐ से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

67. एकादश = ग्यारह
68. एला = इलायची

ऋ से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

69. ऋक्ष = रीछ

क , ख से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

70. किरण = किरन
71. कुपुत्र = कपूत
72. कर्म = काम
73. काक = कौआ
74. कपोत = कबूतर
75. कदली = केला
76. कपाट = किवाड़
77. कीट = कीड़ा
78. कूप = कुआँ
79. कोकिल = कोयल
80. कर्ण = कान
81. कृषक = किसान
82. कुम्भकर = कुम्हार
83. कटु = कडवा
84. कुक्षी = कोख
85. क्लेश = कलेश
86. काष्ठ = काठ
87. कृष्ण = किसन
88. कुष्ठ = कोढ़
89. कृतगृह = कचहरी
90. कर्पूर = कपूर
91. कार्य = काज
92. कार्तिक = कातिक
93. कुक्कुर = कुत्ता
94. कन्दुक = गेंद
95. कच्छप = कछुआ
96. कंटक = काँटा
97. कुमारी = कुँवारी
98. कृपा = किरपा
99. कपर्दिका = कौड़ी
100. कुब्ज = कुबड़ा
101. कोटि = करोड़
102. कर्तव्य = करतब
103. कंकण = कंगन
104. किंचित = कुछ
105. केवर्त = केवट
106. खटवा = खाट

ग , घ से शुरु होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

107. घोटक = घोडा
108. गृह = घर
109. घृत = घी
110. ग्राम = गाँव
111. गर्दभ = गधा
112. घट = घडा
113. ग्रीष्म = गर्मी
114. ग्राहक = गाहक
115. गौ = गाय
116. घृणा = घिन
117. गर्जर = गाजर
118. ग्रन्थि = गाँठ
119. घटिका = घड़ी
120. गोधूम = गेंहूँ
121. ग्राहक = गाहक
122. गौरा = गोरा
123. गृध = गीध
124. गायक = गवैया
125. ग्रामीण = गँवार
126. गोमय = गोबर
127. गृहिणी = घरनी
128. गोस्वामी = गुसाई
129. गोपालक = ग्वाला
130. गर्मी = घाम

च , छ से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

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131. चन्द्र = चाँद
132. छिद्र = छेद
133. चर्म = चमडा
134. चूर्ण = चूरन
135. छत्र = छाता
136. चतुर्विंश = चौबीस
137. चतुष्कोण = चौकोर
138. चतुष्पद = चौपाया
139. चक्रवाक = चकवा
140. चर्म = चाम
141. चर्मकार = चमार
142. चंचु = चोंच
143. चतुर्थ = चौथा
144. चैत्र = चैत
145. चंडिका = चाँदनी
146. चित्रकार = चितेरा
147. चिक्कण = चिकना
148. चवर्ण = चबाना
149. चक = चाक
150. छाया = छाँह

ज , झ से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

151. जिह्वा = जीभ
152. ज्येष्ठ = जेठ
153. जमाता = जवाई
154. ज्योति = जोत
155. जन्म = जनम
156. जंधा = जाँध
157. झरन = झरना
158. जीर्ण = झीना

त , थ से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

159. तैल = तेल
160. तृण = तिनका
161. ताम्र = ताँबा
162. तिथिवार = त्यौहार
163. ताम्बूलिक = तमोली
164. तड़ाग = तालाब
165. त्वरित = तुरंत
166. तपस्वी = तपसी
167. तुंद = तोंद
168. तीर्थ = तीरथ

द , ध से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

169. दूर्वा = दूब
170. दधि = दही
171. दुग्ध = दूध
172. दीपावली = दीवाली
173. धर्म = धरम
174. दंत = दांत
175. दीप = दीया
176. धूम्र = धुआँ
177. धैर्य = धीरज
178. दिशांतर = दिशावर
179. धृष्ठ = ढीठ
180. दंतधावन = दतून
181. दंड = डंडा
182. द्वादश = बारह
183. द्विगुणा = दुगुना
184. दंष्ट्रा = दाढ
185. दिपशलाका = दिया सलाई
186. द्विप्रहरी = दुपहरी
187. धरित्री = धरती
188. दंष = डंका
189. द्विपट = दुपट्टा
190. दुर्बल = दुर्बला
191. दुःख = दुख
192. द्वितीय = इजा
193. दक्षिण = दाहिना
194. धूलि = धुरि
195. धन्नश्रेष्ठी = धन्नासेठी
196. दौहित्र = दोहिता
197. देव = दई

न , प से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

198. पक्षी = पंछी
199. नयन = नैन
200. पत्र = पत्ता
201. नृत्य = नाच
202. निंद्रा = नींद
203. पद = पैर
204. नव्य = नया
205. प्रस्तर = पत्थर
206. नासिका = नाक
207. पिपासा = प्यास
208. पक्ष = पंख
209. नवीन = नया
210. नग्न = नंगा
211. पुत्र = पूत
212. प्रहर = पहर
213. पितृश्वसा = बुआ
214. प्रतिवेश्मिक = पड़ोसी
215. प्रत्यभिज्ञान = पहचान
216. प्रहेलिका = पहेली
217. पुष्प = फूल
218. पृष्ठ = पीठ
219. पौष = पूस
220. पुत्रवधू = पतोहू
221. पंच = पाँच
222. नारिकेल = नारियल
223. निष्ठुर = निठुर
224. पश्चाताप = पछतावा
225. प्रकट = प्रगट
226. प्रतिवासी = पड़ोसी
227. पितृ = पिता
228. पीत = पीला
229. नापित = नाई
230. पर्यंक = पलंग
231. पक्वान्न = पकवान
232. पाषाण =पाहन
233. प्रतिच्छाया = परछाई
234. निर्वाह = निवाह
235. निम्ब = नीम
236. नकुल = नेवला
237. नव = नौ
238. परीक्षा = परख
239. पुष्कर = पोखर
240. पर्ण = परा
241. पूर्व = पूरब
242. पंचदष = पन्द्रह
243. पक्क = पका
244. पट्टिका = पाटी
245. पवन = पौन
246. प्रिय = पिय
247. पुच्छ = पूंछ
248. पर्पट = पापड़
249. फणी = फण
250. पद्म = पदम
251. परख: = परसों
252. पाष = फंदा
253. प्रस्वेदा = पसीना

फ , ब से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

254. बालुका = बालू
255. बिंदु = बूंद
256. फाल्गुन = फागुन
257. बधिर = बहरा
258. बलिवर्द = बैल
259. बली वर्द = बींट

भ , म से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

260. मयूर = मोर
261. मुख = मुँह
262. मक्षिका = मक्खी
263. मस्तक = माथा
264. भिक्षुक = भिखारी
265. मृत्यु = मोत
266. भिक्षा = भीख
267. मातुल = मामा
268. भ्राता = भाई
269. मिष्ट = मीठा
270. मृत्तिका = मिट्टी
271. भुजा = बाँह
272. भगिनी = बहिन
273. मृग = मिरग
274. मनुष्य = मानुष
275. भक्त = भगत
276. भल्लुक = भालू
277. मार्ग = मग
278. मित्र = मीत
279. मुष्टि = मुट्ठी
280. मूल्य = मोल
281. मूषक = मूस
282. मेघ = मेह
283. भाद्रपद = भादौं
284. मौक्तिक = मोती
285. मर्कटी = मकड़ी
286. मश्रु = मूंछ
287. भद्र = भला
288. भ्रत्जा = भतीजा
289. भ्रमर = भौरां
290. भ्रू = भौं
291. मुषल = मूसल
292. महिषी = भैंस
293. मरीच = मिर्च

य , र से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

294. रात्रि = रात
295. युवा = जवान
296. यश = जस
297. राशि = रास
298. रोदन = रोना
299. योगी = जोगी
300. राजा = राय
301. यमुना = जमुना
302. यज्ञोपवीत = जनेऊ
303. यव = जौ
304. राजपुत्र = राजपूत
305. यति = जति
306. यूथ = जत्था
307. युक्ति = जुगति
308. रक्षा = राखी
309. रज्जु = रस्सी
310. रिक्त = रीता
311. यषोदा = जसोदा

ल , व से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

312. वानर = बन्दर
313. लौह = लोहा
314. वत्स = बच्चा
315. विवाह = ब्याह
316. वधू = बहू
317. वाष्प = भाप
318. विद्युत् = बिजली
319. वार्ता = बात
320. लक्ष = लाख
321. लक्ष्मण = लखन
322. व्याघ्र = बाघ
323. वणिक = बनिया
324. वाणी = बैन
325. वरयात्रा = बारात
326. वर्ष = बरस
327. वैर = बैर
328. लज्जा = लाज
329. लवंग = लौंग
330. लोक = लोग
331. वट = बड
332. वज्रांग = बजरंग
333. वल्स = बछड़ा
334. लोमशा = लोमड़ी
335. वक = बगुला
336. वंष = बांस
337. वृश्चिका = बिच्छु
338. लवणता = लुनाई
339. लेपन = लीपना
340. विकार = विगाड
341. व्यथा = विथा
342. वर्षा = बरसात

स , श , ष , श्र से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

343. सूर्य = सूरज
344. स्वर्ण = सोना
345. स्तन = थन
346. सूची = सुई
347. सुभाग = सुहाग
348. शिक्षा = सीख
349. शुष्क = सूखा
350. सत्य = सच
351. सर्प = साँप
352. श्रंगार = सिंगर
353. शत = सौ
354. सप्त = सात
355. शर्कर = शक्कर
356. शिर = सिर
357. श्रृंग = सींग
358. श्रेष्ठी = सेठ
359. श्रावण = सावन
360. शाक = साग
361. शलाका = सलाई
362. श्यामल = साँवला
363. शून्य = सूना
364. शप्तशती = सतसई
365. स्फोटक = फोड़ा
366. स्कन्ध = कंधा
367. स्नेह = नेह
368. श्यालस = साला
369. शय्या = सेज
370. स्वसुर = ससुर
371. श्रंखला = साँकल
372. श्रृंगाल = सियार
373. शिला = सिल
374. सूत्र = सूत
375. शीर्ष = सीस
376. स्थल = थल
377. स्थिर = थिर
378. ससर्प = सरसों
379. सपत्नी = सौत
380. स्वर्णकार = सुनार
381. शूकर = सूअर
382. शाप = श्राप
383. श्याली = साली
384. श्मषान = समसान
385. शुक = सुआ

ह , क्ष से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

386. हास्य = हँसी
387. क्षीर = खीर
388. क्षेत्र = खेत
389. हिरन = हरिण
390. हस्त = हाथ
391. हस्ती = हाथी
392. क्षत्रिय = खत्री
393. क्षार = खार
394. क्षत = छत
395. हरिद्रा = हल्दी
396. क्षति = छति
397. क्षीण = छीन
398. क्षत्रिय = खत्री
399. हट्ट = हाट
400. होलिका = होली
401. ह्रदय = हिय
402. हंडी = हांड़ी

त्र से शुरू होने वाले तत्सम = तद्भव शब्द :-

403. त्रिणी = तीन
404. त्रयोदष = तेरह

Bhav Vachak Sangya-भाववाचक संज्ञा की परिभाषा और उसे बनाने के नियम

Hindi Grammer Ke Important Topics:

भाववाचक संज्ञा क्या होती है :-

जो शब्द पदार्थों की अवस्था , गुण , दोष , धर्म , दशा , स्वभाव आदि का बोध कराते हैं उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं।

जैसे :- बुढ़ापा , मिठास , बचपन , चढाई , थकावट , मोटापा , मानवता , चतुराई , जवानी , लम्बाई , मित्रता , मुस्कुराहट , अपनापन , परायापन , भूख , प्यास , चोरी , क्रोध , सुन्दरता आदि।

भाववाचक संज्ञा बनाना :-

1. जातिवाचक संज्ञा से
2. सर्वनाम से
3. विशेषण से
4. क्रिया से
5. संज्ञा से
6. अव्यय से

1. जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना :-

जातिवाचक संज्ञा = भाववाचक संज्ञा के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

दास = दासता
पंडित = पांडित्य
बंधु = बंधुत्व
क्षत्रिय = क्षत्रियत्व
पुरुष = पुरुषत्व
प्रभु = प्रभुता
पशु = पशुता , पशुत्व
ब्राह्मण = ब्राह्मणत्व
मित्र = मित्रता
बच्चा = बचपन
शैतान = शैतानी
मानव = मानवता
बूढ़ा = बुढ़ापा
दोस्त = दोस्ती
लड़का = लडकापन
मनुष्य = मनुष्यता
आदमी से आदमियता
शत्रु = शत्रुता
शहर = शहरी
मूर्ख = मूर्खता
घर = घरेलू
देहात = देहाती
समाज = सामाजिकता
विद्वान् = विद्वता
जाति = जातियता
स्त्री = स्त्रीत्व
चोर = चोरी
क्षत्रिय = क्षत्रियत्व
ब्राह्मण = ब्राह्मणत्व
डाकू = डाका , डकैती
दानव = दानवता
गुरु = गुरुत्व
नर = नरत्ता
नारी = नारीत्व
बालक = बालकपन
युवक = यौवन
शिशु = शैशव
शिष्य = शिष्यत्व
माता = मातृत्व
भ्राता = भ्रातृत्व
साधु = साधुता
दूत = दौत्य
प्रतिनिधि = प्रतिनिधित्व
राष्ट्र = राष्ट्रीयता
भाई = भाईचारा
इन्सान = इंसानियत
वकील = वकालत
कृपण = कृपणता
बहन = बहनापा
शास्त्र = शास्त्रीयता
दनुज = दनुजता
पात्र = पात्रता
अध्यापक = अध्यापन
सेवक = सेवा

2. सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना :-

सर्वनाम शब्द = भाववाचक संज्ञा के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

अपना = अपनापन , अपनत्व
निज = निजत्व , निजता
पराया = परायापन
स्व = स्वत्व
सर्व = सर्वस्व
निज = निजत्व
मम = ममता , ममत्व
आप = आपा
अहं = अहंकार

3. विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनाना :-

विशेषण शब्द = भाववाचक संज्ञा शब्द के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

मीठा = मिठास
चतुर = चातुर्य , चतुराई
मधुर = माधुर्य , मधुरता
सुंदर = सौन्दर्य , सुन्दरता
अच्छा = अच्छाई
नीच = नीचता
बड़ा = बडप्पन
सरल = सरलता
निपुण = निपुणता
रिक्त = रिक्तता
निर्बल = निर्बलता
तीक्ष्ण = तीक्ष्णता
सफल = सफलता
प्रवीण = प्रवीणता
उदार = उदारता
वक्र = वक्रता
वाचाल = वाचालता
सीतल = सीतलता
कायर = कायरता
कातर = कातरता
धीर = धीरता
खट्टा = खटास
बुरा = बुराई
छोटा = छुटपन
भला = भलाई
तीखा = तीखापन
ढीठ = ढिठाई
बाँका = बाँकपन
नीचा = निचाई
लघु = लाघव
ऊँचा = ऊँचाई
साधु = साधुत्व
लम्बा = लम्बाई
बूढ़ा = बुढ़ापा
मोटा = मोटाई
रांड = रंडापा
उचित = औचित्य
चिकना = चिकनापन
जंगली = जंगलीपन
बंध्या = बंध्यात्व
गंभीर = गंभीरता
मूर्ख = मूर्खता
मूढ़ = मूढ़ता
आवश्यक = आवश्यकता
कटु = कटुता
गुरु = गुरुता , गुरुत्व
गरीब = गरीबी
कठोर = कठोरता
गर्म = गर्मी
ठंडा = ठंडक
चौड़ा = चौडाई
गंदा = गंदगी
सामाजिक = सामाजिकता
काला = कालापन
नीला = नीलापन
लाल = लाली
वीर = वीरता
लालची = लालच
डरावना = डर
क्रोधी = क्रोध
भिन्न = भिन्नता
शांत = शांति
सभ्य = सभ्यता
एक = एकता
निपुण = निपुणता
मूढ़ = मूढ़ता
गोरा = गोरापन , गोराई
दुष्ट = दुष्टता
संपन्न = संपन्नता
प्रयुक्त = प्रयाग
अंध = अधिकार , अँधेरा
सुखद = सुखदायी
विपन्न = विपन्नता
साहित्यिक = साहित्य
एक = एकता
शूर = शूरता , शौर्य
सम = समता , समानता
पथरीली = पथरीलापन
क्षुब्ध = क्षोभ
बहुत = बहुतायत
शीघ्र = शीघ्रता
अमीर = अमीरी
रोगी = रोग
साफ = सफाई
पीला = पीलापन
उपेक्षित = उपेक्षा
फुर्तीला = फुर्ती
धीरज = धीरता
स्वस्थ = स्वास्थ्य
नम्र = नम्रता
अशिष्ट = अशिष्टता
तेज = तेजी
आसक्त = आसक्ति
अरुण = अरुणिमा
नूतन = नुत्तनता
गँवार = गँवारपन
सौम्य = सौम्यता
जाति = जातियता
कुमार , कुमारी = कौमार्य
हिंसक = हिंसकता
बुद्धिमान = बुद्धिमानी
हरा = हरीतिमा
कुशल = कौशल
टेढ़ा = टेढ़ापन
जाग्रत = जागरण
आलसी = आलस्य
नवाब = नवाबी
बेईमान = बेईमानी
दीन = दीनता , दैन्य
पागल = पागलपन
सर्द = सर्दी
सफेद = सफेदी
श्रेष्ठ = श्रेष्ठता

4. क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना :-

यह भी पढ़ें :  Tatsam Tadbhav , Paryayvachi Shabd

क्रिया शब्द = भाववाचक संज्ञा शब्द के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

खेलना = खेल
थकना = थकावट
लिखना = लेख
हँसना = हँसी
दौड़ना = दौड़
धोना = धुलाई
पढना = पढाई
खोजना = खोज
सीना = सिलाई
जितना = जीत
रोना = रुलाई
लड़ना = लड़ाई
पढना = पढाई
चलना = चाल , चलन
पीटना = पिटाई
देखना = दिखावा , दिखावट
समझना = समझ
सींचना = सिंचाई
पड़ना = पड़ाव
पहनना = पहनावा
चमकना = चमक
लूटना = लुट
जोड़ना = जोड़
घटना = घटाव
नाचना = नाच
बोलना = बोल
पूजना = पूजन
झुलना = झूला
जोतना = जुताई
कमाना = कमाई
बचना = बचाव
रुकना = रुकावट
बनना = बनावट
मिलना = मिलावट
बुलाना = बुलावा
भूलना = भूल
छापना = छापा , छपाई
बैठना = बैठक , बैठकी
बढना = बाढ़
घेरना = घेरा
छींकना = छींक
फिसलना = फिसलन
खपना = खपत
रँगना = रँगाई , रंगत
मुसकाना = मुसकान
उड़ना = उड़ान
घबराना = घबराहट
मुड़ना = मोड़
सजाना = सजावट
चढना = चढाई
बहना = बहाव
मारना = मार
दौड़ना = दौड़
गिरना = गिरावट
कूदना = कूद
मंद = मंदी
दूर = दुरी
तीव्र = तीव्रता
उतरना = उतार
पुकारना = पुकार
लिखना = लिखावट
बनाना = बनावट
चलना = चलन
बिकना = बिक्री
जपना = जाप
जमना = जमाव
छटपटाना = छटपटाहट
उतरना = उतराई
कमाना = कमाई
कूदना = कूद
कोंधना = कोंध
गाना = गान
जीना = जीवन
ठगना = ठगी
थिरकना = थिरकन
देना = देन
पालना = पालन
बरसना = बारिश
बोना = बुवाई
बौखलाना = बौखलाहट
भिड़ना = भिडंत
भूलना = भूल
लेना = लेन
हारना = हार
चीखना = चीख
विकसित होना = विकास

5. संज्ञा से भाववाचक बनाना :-

संज्ञा शब्द से भाववाचक संज्ञा शब्द के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

बाल = बालपन
देव = देवत्व
बालक = बालकपन
नारी = नारीत्व
बच्चा = बचपन
स्त्री = स्त्रीत्व
लड़का = लडकपन
पुरुष = पुरुषत्व
मनुष्य = मनुष्यता
पशु = पशुत्व
भार = भारीपन
मित्र = मित्रता
किशोर = किशोरपन
दास = दासता
मानव = मानवता
प्रभु = प्रभुता
पंडित = पांडित्य
शत्रु = शत्रुता
क्षत्रिय = क्षत्रियत्व
विद्वान् = विद्वता
शिशु = शैशव
साधु = साधुता
पंच = पंचायत
गुरु = गुरुता
बंधु = बंधुत्व
युवा = यौवन
नर = नरत्व
मीत = मिताई
देव = देवत्व
सुजन = सौजन्य
अमर = अमरत्व
चोर = चोरी
सखा = सख्य
ब्राह्मण = ब्राह्मणत्व
इन्सान = इंसानियत
डाकु = डाका , डकैती
ईश्वर = ईश्वर्य
बालक = बालकपन
किशोर = किशोरपन
दास = दासता
मानव = मानवता
प्रभु = प्रभुता
मनुष्य = मनुष्यता
दानव = दानवता
बूढ़ा = बुढ़ापा
शत्रु = शत्रुता
मित्र = मैत्री
शिष्य = शिष्यत्व
माता = मातृत्व
भ्राता = भ्रातृत्व
पिता = पितृत्व
दूत = दौत्य
प्रतिनिधि = प्रतिनिधित्व
राष्ट्र = राष्ट्रीयता
वकील = वकालत
कृपण = कृपणता
बहन = बहनापा

6. अव्यय से भाववाचक संज्ञा बनाना :-

अव्यय शब्दों से भाववाचक संज्ञा शब्द के उदाहरण इस प्रकार हैं :-

परस्पर = पारस्पर्य
समीप = सामीप्य
निकट = नैकट्य
शाबाश = शाबाशी
वाहवाह = वाहवाही
धिक् = धिक्कार
शीघ्र = शीघ्रता
दूर = दुरी
मना = मनाही
हा-हा = हाहाकार

अव्यय की परिभाषा, भेद और उदाहरण

Hindi Grammer Ke Important Topics:

अव्यय क्या होता है :-

अव्यय का शाब्दिक अर्थ होता है – जो व्यय न हो। जिनके रूप में लिंग , वचन , पुरुष , कारक , काल आदि की वजह से कोई परिवर्तन नहीं होता उसे अव्यय शब्द कहते हैं। अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं। इन शब्दों को अविकारी शब्द भी कहा जाता है।

जैसे :- जब , तब , अभी ,अगर , वह, वहाँ , यहाँ , इधर , उधर , किन्तु , परन्तु , बल्कि , इसलिए , अतएव , अवश्य , तेज , कल , धीरे , लेकिन , चूँकि , क्योंकि आदि।

अव्यय के भेद :-

1. क्रिया-विशेषण अव्यय
2. संबंधबोधक अव्यय
3. समुच्चयबोधक अव्यय
4. विस्मयादिबोधक अव्यय
5. निपात अव्यय

1. क्रिया-विशेषण अव्यय :- जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उसे क्रिया -विशेषण कहते हैं। जहाँ पर यहाँ , तेज , अब , रात , धीरे-धीरे , प्रतिदिन , सुंदर , वहाँ , तक , जल्दी , अभी , बहुत आते हैं वहाँ पर क्रियाविशेषण अव्यय होता है।

जैसे :- (i) वह यहाँ से चला गया।
(ii) घोडा तेज दौड़ता है।
(iii) अब पढना बंद करो।
(iv) बच्चे धीरे-धीरे चल रहे थे।
(v) वे लोग रात को पहुँचे।
(vi) सुधा प्रतिदिन पढती है।
(vii) वह यहाँ आता है।
(viii) रमेश प्रतिदिन पढ़ता है।
(ix) सुमन सुंदर लिखती है।
(x) मैं बहुत थक गया हूँ।

प्रयोग के आधार पर क्रिया -विशेषण अव्यय के भेद :-

1. साधारण क्रियाविशेषण अव्यय
2. संयोजक क्रियाविशेषण अव्यय
3. अनुबद्ध क्रियाविशेषण अव्यय

1. साधारण क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन शब्दों का प्रयोग वाक्यों में स्वतंत्र रूप से किया जाता है उन्हें साधारण क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) हाय! अब मैं क्या करूँ।
(ii) बेटा जल्दी जाओ !
(iii) अरे! वह सांप कहाँ गया ?

2. संयोजक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन शब्दों का संबंध किसी उपवाक्य के साथ होता है उन्हें संयोजक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) जब अंकित ही नहीं तो मैं जी कर क्या करूंगी।
(ii) जहाँ पर अब समुद्र है वहाँ पर कभी जंगल था।

3. अनुबद्ध क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन शब्दों का प्रयोग निश्चय के लिए किसी भी शब्द भेद के साथ किया जाता है उन्हें अनुबद्ध क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) मैंने उसे देखा तक नहीं।
(ii) आपके आने भर की देर है।

रूप के आधार पर क्रियाविशेषण अव्यय के भेद :-

1. मूल
2. यौगिक
3. स्थानीय

1. मूल :- जिन शब्दों में दूसरे शब्दों के मेल की जरूरत नहीं पडती उन्हें मूल क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) अचानक से सांप आ गया।
(ii) मैं अभी नही आया।

2. यौगिक :- जो शब्द दूसरे शब्द में प्रत्यय या पद जोड़ने से बनते हैं उन्हें यौगिक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) तुम रातभर में आ जाना।
(ii) वह चुपके से जा रहा था।

3. स्थानीय :- वे अन्य शब्द भेद जो बिना किसी परिवर्तन के विशेष स्थान पर आते हैं उन्हें स्थानीय क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) वह अपना सिर पढ़ेगा।
(ii) तुम दौडकर चलते हो।

अर्थ क अनुसार क्रिया -विशेषण अव्यय के भेद :-

1. कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय
2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय
3. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय
4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय

1. कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार के होने का पता चले उसे कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर आजकल , अभी , तुरंत , रातभर , दिन , भर , हर बार , कई बार , नित्य , कब , यदा , कदा , जब , तब , हमेशा , तभी , तत्काल , निरंतर , शीघ्र पूर्व , बाद , पीछे , घड़ी-घड़ी , अब , तत्पश्चात , तदनन्तर , कल , फिर , कभी , प्रतिदिन , दिनभर , आज , परसों , सायं , पहले , सदा , लगातार आदि आते है वहाँ पर कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय होता है।

जैसे :- (i) वह नित्य टहलता है।
(ii) वे कब गए।
(iii) सीता कल जाएगी।
(iv) वह प्रतिदिन पढ़ता है।
(v) दिन भर वर्षा होती है।
(vi) कृष्ण कल जायेगा।

2. स्थान क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार के होने के स्थान का पता चले उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर यहाँ , वहाँ , भीतर , बाहर , इधर , उधर , दाएँ , बाएँ , कहाँ , किधर , जहाँ , पास , दूर , अन्यत्र , इस ओर , उस ओर , ऊपर , नीचे , सामने , आगे , पीछे , आमने आते है वहाँ पर स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय होता है।

जैसे :- (i) मैं कहाँ जाऊं ?
(ii) तारा कहाँ अवम किधर गई ?
(iii) सुनील नीचे बैठा है।
(iv) इधर -उधर मत देखो।
(v) वह आगे चला गया।
(vi) उधर मत जाओ।

3. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार के परिणाम का पता चलता है उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं। जिन अव्यय शब्दों से नाप-तोल का पता चलता है।

जहाँ पर थोडा , काफी , ठीक , ठाक , बहुत , कम , अत्यंत , अतिशय , बहुधा , थोडा -थोडा , अधिक , अल्प , कुछ , पर्याप्त , प्रभूत , न्यून , बूंद-बूंद , स्वल्प , केवल , प्राय: , अनुमानत: , सर्वथा , उतना , जितना , खूब , तेज , अति , जरा , कितना , बड़ा , भारी , अत्यंत , लगभग , बस , इतना , क्रमश: आदि आते हैं वहाँ पर परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) मैं बहुत घबरा रहा हूँ।
(ii) वह अतिशय व्यथित होने पर भी मौन है।
(iii) उतना बोलो जितना जरूरी हो।
(iv) रमेश खूब पढ़ता है।
(v) तेज गाड़ी चल रही है।
(vi) सविता बहुत बोलती है।
(vii) कम खाओ।

4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से कार्य के व्यापार की रीति या विधि का पता चलता है उन्हें रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर ऐसे , वैसे , अचानक , इसलिए , कदाचित , यथासंभव , सहज , धीरे , सहसा , एकाएक , झटपट , आप ही , ध्यानपूर्वक , धडाधड , यथा , ठीक , सचमुच , अवश्य , वास्तव में , निस्संदेह , बेशक , शायद , संभव है , हाँ , सच , जरुर , जी , अतएव , क्योंकि , नहीं , न , मत , कभी नहीं , कदापि नहीं , फटाफट , शीघ्रता , भली-भांति , ऐसे , तेज , कैसे , ज्यों , त्यों आदि आते हैं वहाँ पर रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं।

जैसे :- (i) जरा , सहज एवं धीरे चलिए।
(ii) हमारे सामने शेर अचानक आ गया।
(iii) कपिल ने अपना कार्य फटाफट कर दिया।
(iv) मोहन शीघ्रता से चला गया।
(v) वह पैदल चलता है।

2. संबंधबोधक अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों के कारण संज्ञा के बाद आने पर दूसरे शब्दों से उसका संबंध बताते हैं उन शब्दों को संबंधबोधक शब्द कहते हैं। ये शब्द संज्ञा से पहले भी आ जाते हैं।

जहाँ पर बाद , भर , के ऊपर , की और , कारण , ऊपर , नीचे , बाहर , भीतर , बिना , सहित , पीछे , से पहले , से लेकर , तक , के अनुसार , की खातिर , के लिए आते हैं वहाँ पर संबंधबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) मैं विद्यालय तक गया।
(ii) स्कूल के समीप मैदान है।
(iii) धन के बिना व्यवसाय चलाना कठिन है।
(iv) सुशील के भरोसे यह काम बिगड़ गया।
(v) मैं पूजा से पहले स्नान करता हूँ।
(vi) मैंने घर के सामने कुछ पेड़ लगाये हैं।
(vii) उसका साथ छोड़ दीजिये।
(viii) छत पर कबूतर बैठा है।
(ix) राम भोजन के बाद जायेगा।
(x) मोहन दिन भर खेलता है।
(xi) छत के ऊपर राम खड़ा है।
(xii) रमेश घर के बाहर पुस्तक रख रहा था।
(xiii) पाठशाला के पास मेरा घर है।
(xiv) विद्या के बिना मनुष्य पशु है।

यह भी पढ़ें :  Bhav Vachak Sangya, Noun In Hindi

प्रयोग की पुष्टि से संबंधबोधक अव्यय के भेद :-
1. सविभक्तिक
2. निर्विभक्तिक
3. उभय विभक्ति

1. सविभक्तिक :- जो अव्यय शब्द विभक्ति के साथ संज्ञा या सर्वनाम के बाद लगते हैं उन्हें सविभक्तिक कहते हैं। जहाँ पर आगे , पीछे , समीप , दूर , ओर , पहले आते हैं वहाँ पर सविभक्तिक होता है।

जैसे :- (i) घर के आगे स्कूल है।
(ii) उत्तर की ओर पर्वत हैं।
(iii) लक्ष्मण ने पहले किसी से युद्ध नहीं किया था।

2. निर्विभक्तिक :- जो शब्द विभक्ति के बिना संज्ञा के बाद प्रयोग होते हैं उन्हें निर्विभक्तिक कहते हैं। जहाँ पर भर , तक , समेत , पर्यन्त आते हैं वहाँ पर निर्विभक्तिक होता है।

जैसे :- (i) वह रात तक लौट आया।
(ii) वह जीवन पर्यन्त ब्रह्मचारी रहा।
(iii) वह बाल बच्चों समेत यहाँ आया।

3. उभय विभक्ति :- जो अव्यय शब्द विभक्ति रहित और विभक्ति सहित दोनों प्रकार से आते हैं उन्हें उभय विभक्ति कहते हैं। जहाँ पर द्वारा , रहित , बिना , अनुसार आते हैं वहाँ पर उभय विभक्ति होता है।

जैसे :- (i) पत्रों के द्वारा संदेश भेजे जाते हैं।
(ii) रीति के अनुसार काम होना है।

3. समुच्चयबोधक अव्यय :- जो शब्द दो शब्दों , वाक्यों और वाक्यांशों को जोड़ते हैं उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। इन्हें योजक भी कहा जाता है। ये शब्द दो वाक्यों को परस्पर जोड़ते हैं।

जहाँ पर और , तथा , लेकिन , मगर , व , किन्तु , परन्तु , इसलिए , इस कारण , अत: , क्योंकि , ताकि , या , अथवा , चाहे , यदि , कि , मानो , आदि , यानि , तथापि आते हैं वहाँ पर समुच्चयबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) सूरज निकला और पक्षी बोलने लगे।
(ii) छुट्टी हुई और बच्चे भागने लगे।
(iii) किरन और मधु पढने चली गईं।
(iv) मंजुला पढने में तो तेज है परन्तु शरीर से कमजोर है।
(v) तुम जाओगे कि मैं जाऊं।
(vi) माता जी और पिताजी।
(vii) मैं पटना आना चाहता था लेकिन आ न सका।
(viii) तुम जाओगे या वह आयेगा।
(ix) सुनील निकम्मा है इसलिए सब उससे घर्णा करते हैं।
(x) गीता गाती है और मीरा नाचती है।
(xi) यदि तुम मेहनत करते तो अवश्य सफल होगे।
(xii) मोहन पढ़ता है और सोहन लिखता है।

समुच्चयबोधक अव्यय के भेद :-

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय :- जिन शब्दों से समान अधिकार के अंशों के जुड़ने का पता चलता है उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं।

जहाँ पर किन्तु , और , या , अथवा , तथा , परन्तु , व , लेकिन , इसलिए , अत: , एवं आते है वहाँ पर समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) कविता और गीता एक कक्षा में पढ़ते हैं।
(ii) मैं और मेरी पुत्री एवं मेरे साथी सभी साथ थे।

2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों में एक शब्द को मुख्य माना जाता है और एक को गौण। गौण वाक्य मुख्य वाक्य को एक या अधिक उपवाक्यों को जोड़ने का काम करता है। जहाँ पर चूँकि , इसलिए , यद्यपि , तथापि , कि , मानो , क्योंकि , यहाँ , तक कि , जिससे कि , ताकि , यदि , तो , यानि आते हैं वहाँ पर व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय होता है।

जैसे :- (i) मोहन बीमार है इसलिए वह आज नहीं आएगा।
(ii) यदि तुम अपनी भलाई चाहते हो तो यहाँ से चले जाओ।
(iii) मैंने दिन में ही अपना काम पूरा कर लिया ताकि मैं शाम को जागरण में जा सकूं।

4. विस्मयादिबोधक अव्यय :- जिन अव्यय शब्दों से हर्ष , शोक , विस्मय , ग्लानी , लज्जा , घर्णा , दुःख , आश्चर्य आदि के भाव का पता चलता है उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। इनका संबंध किसी पद से नहीं होता है। इसे घोतक भी कहा जाता है। विस्मयादिबोधक अव्यय में (!) चिन्ह लगाया जाता है।

जैसे :- (i) वाह! क्या बात है।
(ii) हाय! वह चल बसा।
(iii) आह! क्या स्वाद है।
(iv) अरे! तुम यहाँ कैसे।
(v) छि:छि:! यह गंदगी।
(vi) वाह! वाह! तुमने तो कमाल कर दिया।
(vii) अहो! क्या बात है।
(viii) अहा! क्या मौसम हैं।
(ix) अरे! आप आ गये।
(x) हाय! अब मैं क्या करूँ।
(xi) अरे! पीछे हो जाओ , गिर जाओगे।
(xii) हाय! राम यह क्या हो गया।

भाव के आधार पर विस्मयादिबोधक अव्यय के भेद :-
(1) हर्षबोधक
(2) शोकबोधक
(3) विस्मयादिबोधक
(4) तिरस्कारबोधक
(5) स्वीकृतिबोधक
(6) संबोधनबोधक
(7) आशिर्वादबोधक

(1) हर्षबोधक :- जहाँ पर अहा! , धन्य! , वाह-वाह! , ओह! , वाह! , शाबाश! आते हैं वहाँ पर हर्षबोधक होता है।

(2) शोकबोधक :- जहाँ पर आह! , हाय! , हाय-हाय! , हा, त्राहि-त्राहि! , बाप रे! आते हैं वहाँ पर शोकबोधक आता है।

(3) विस्मयादिबोधक :- जहाँ पर हैं! , ऐं! , ओहो! , अरे वाह! आते हैं वहाँ पर विस्मयादिबोधक होता है।

(4) तिरस्कारबोधक :- जहाँ पर छि:! , हट! , धिक्! , धत! , छि:छि:! , चुप! आते हैं वहाँ पर तिरस्कारबोधक होता है।

(5) स्वीकृतिबोधक :- जहाँ पर हाँ-हाँ! , अच्छा! , ठीक! , जी हाँ! , बहुत अच्छा! आते हैं वहाँ पर स्वीकृतिबोधक होता है।

(6) संबोधनबोधक :- जहाँ पर रे! , री! , अरे! , अरी! , ओ! , अजी! , हैलो! आते हैं वहाँ पर संबोधनबोधक होता है।

(7) आशीर्वादबोधक :- जहाँ पर दीर्घायु हो! , जीते रहो! आते हैं वहाँ पर आशिर्वादबोधक होता है।

5. निपात अव्यय :- जो वाक्य में नवीनता या चमत्कार उत्पन्न करते हैं उन्हें निपात अव्यय कहते हैं। जो अव्यय शब्द किसी शब्द या पद के पीछे लगकर उसके अर्थ में विशेष बल लाते हैं उन्हें निपात अव्यय कहते हैं। इसे अवधारक शब्द भी कहते हैं। जहाँ पर ही , भी , तो , तक ,मात्र , भर , मत , सा , जी , केवल आते हैं वहाँ पर निपात अव्यय होता है।

जैसे :- (i) प्रशांत को ही करना होगा यह काम।
(ii) सुहाना भी जाएगी।
(iii) तुम तो सनम डूबोगे ही , सब को डुबाओगे।
(iv) वह तुमसे बोली तक नहीं।
(v) पढाई मात्र से ही सब कुछ नहीं मिल जाता।
(vi) तुम उसे जानता भर हो।
(vii) राम ने ही रावण को मारा था।
(viii) रमेश भी दिल्ली जाएगा।(ix) तुम तो कल जयपुर जाने वाले थे।
(x) राम ही लिख रहा है।

क्रिया -विशेषण और संबंधबोधक अव्यय में अंतर :-

जब अव्यय शब्दों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम के साथ किया जाता है तब ये संबंधबोधक होते हैं और जब अव्यय शब्द क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं तब ये क्रिया -विशेषण होते हैं।

जैसे :- (i) बाहर जाओ।
(ii) घर से बाहर जाओ।
(iii) उनके सामने बैठो।
(iv) मोहन भीतर है।
(v) घर के भीतर सुरेश है।
(vi) बाहर चले जाओ।

समरूपी भिन्नार्थक शब्द

Hindi Grammer Ke Important Topics:

समरूप भिन्नार्थक शब्द :-

समरूप भिन्नार्थक शब्द चार शब्दों से मिलकर बने होते हैं – श्रुति+सम+भिन्न+अर्थ। जिसका अर्थ होता है समान लगने वाला परन्तु भिन्न। जो शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं पर उनके अर्थ अलग होते हैं उन्हें समरूप भिन्नार्थक शब्द कहते हैं। इन्हें समध्वनि , समत्रुत , समोच्चरित और श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द भी कहते हैं।

पहला समरूप शब्द (अर्थ) = दूसरा समरूप शब्द (अर्थ) के उदहारण इस प्रकार हैं :-

1. अनल (आग) = अनिल (हवा, वायु)
2. ओर (तरफ) = और (तथा)
3. कुल (वंश) = कूल (किनारा)
4. पानी (जल) = पाणि (हाथ)
5. शर (बाण) = सर (तालाब)
6. कंगाल (गरीब) = कंकाल (ठठरी)
7. अवधि (समय) = अवधि (अवध की भाषा)
8. नीरद (बादल) = नीरज (कमल)
9. प्रमाण (सबूत) = प्रणाम (नमस्कार)
10. कोश (शब्द-भंडार) = कोष (खजाना)
11. अचार (आम, निम्बू का अचार) = आचार (आचरण)
12. अनु (पीछे) = अणु (कण)
13. अपेक्षा (उम्मीद, तुलना) = उपेक्षा (अनादर)
14. अभय (निडर) = उभय (दोनों)
15. कपट (धोखा) = कपाट (दरवाजा)
16. दिन (दिवस) = दीन (गरीब)
17. दिशा (तरफ) = दशा (हालत)
18. देव (देवता) = दैव (भाग्य)
19. द्वार (दरवाजा) = द्वारा (के माध्यम से)
20. धन (दौलत) = धान (चावल)
21. नादान (बेसमझ) = निदान (इलाज)
22. पका (पका हुआ) = पक्का (मजबूत)
23. शोक (दुःख) = शौक (चाव)
24. श्याम (काला) = शाम (संध्या)
25. अन्न (अनाज) = अन्य (दूसरा)
26. कलि (कलयुग) = कली (अधखिला फूल)
27. अंश (भाग) = अंस (कंधा)
28. अपकार (बुरा कार्य) = उपकार (भला कार्य)
29. ग्रह (मंगल ,शुक्र) = गृह (घर)
30. उपयुक्त (उचित) = उपर्युक्त (ऊपर लिखा गया)
31. सूर (अँधा) = शूर (वीर)
32. किला (दुर्ग) = कीला (खूंटा)
33. करण (करण कारक) = कर्ण (कान)
34. चरम (अंतिम) = चर्म (खाल)
35. निधन (मृत्यु) = निर्धन (गरीब)
36. लक्ष (लाख) = लक्ष्य (उद्देश्य)
37. अलि (भँवरा) = अली (सखी,मित्र)
38. अंक (गोद) = अंग (शरीर का हिस्सा)

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39. अंतर (ह्रदय) = अंदर (भीतर)
40. आदि (आरम्भ) = आदी (आदत होना)
41. आधि (मानसिक रोग) = आधी (आधा हिस्सा)
42. अवश्य (जरुर) = अवश (लाचार)
43. कर्म (काम) = क्रम (सिलसिला)
44. आकर (खान,भंडार) = आकार (आकृति)
45. समान (बराबर) = सामान (वस्तु)
46. द्रव (तरल पदार्थ) = द्रव्य (धन दौलत)
47. दीप (दीपक) = द्वीप (टापू)
48. चालक (चलाने वाला) = चालाक (चतुर)
49. चर्म (चमड़ा) = चरम (अंतिम)
50. प्रकार (भेद) = प्राकार (खाई)
51. प्रसाद (कृपा) = प्रासाद (महल)
52. तुरंग (घोडा) = तरंग (लहर)
53. जरा (बुढ़ापा) = ज़रा (थोडा सा)
54. नीड़ (घोंसला) = नीर (जल)
55. मूल्य (कीमत) = मूल (जड़)
56. भवन (घर) = भुवन (संसार)
57. शस्त्र (हथियार) = शास्त्र (कोई भी धार्मिक ग्रन्थ)
58. शाल (वृक्ष या चादर) = साल (वर्ष)
59. कटक (सेना का समूह) = कंटक (काँटा)
60. परिमाण (मात्रा) = परिणाम (नतीजा)
61. गुरु (आचार्य) = गुर (उपाय)
62. आसन (बैठने के लिए बिछौना) = आसन्न (निकट होना)
63. अविराम (बिना रुके) = अभिराम (सुंदर)
64. चपल (चंचल) = चपला (बिजली)
65. बदन (शरीर) = वदन (मुख)
66. प्रधान (मुख्य) = प्रदान (देना)
67. खान (मुस्लिम पठान) = खान (खदान)
68. अंत (समाप्त) = अंत्य (आखिरी)
69. बात (वचन) = वात (हवा)
70. अभय (निर्भय) = उभय (दोनों)
71. अब्ज (कमल) = अब्द (बादल)
72. अम्बुज (कमल) = अम्बुधि (सागर)
73. अँगना (आँगन) = अंगना (स्त्री)
74. अवलम्ब (सहारा) = अविलम्ब (शीघ्र)
75. अभिराम (सुंदर) = अविराम (लगातार)
76. जल्द (बादल) = जलज (कमल)
77. तरणि (सूर्य) = तरणी (छोटी नाव)
78. नियत (निश्चित) = नियति (भाग्य)
79. निश्छल (छल रहित) = निश्चल (अटल)
80. पुरुष (नर) = परुष (कठोर)
81. प्रवाह (बहने की क्रिया) = परवाह (चिंता)
82. पर्ण (पत्ता) = प्रण (प्रतिज्ञा)
83. दारु(लकड़ी) = दारू (शराब)
84. तरी (गीलापन) = तरि (नाव)
85. प्रमाण (साक्ष्य) = परिमाण (मात्रा)
86. अतुल (जिसकी तुलना न हो) = अतल (तलहीन)
87. अगम (दुर्लभ) = आगम (प्राप्ति)
88. आवास (निवास स्थान) = आभास (झलक)
89. इत्र (सुगंध) = इतर (दूसरा)
90. कृति (रचना) = कृती (निपुण)
91. कृपाण (कटार) = कृपण (कंजूस)
92. कटिबद्ध (तैयार) = कटिबन्ध (कमरबंध)
93. चिर (पुराना) = चीर (कपडा)
94. डीठ (दृष्टि) = ढीठ (निडर)
95. तड़ाक (जल्दी) = तड़ाग (तालाब)
96. तक्र (मट्ठा) = तर्क (बहस)
97. अर्क (सूर्य) = अर्घ (पूजा का जल)
98. असमान (जो बराबर न हो) = आसमान (आकाश)
99. गदा (एक हथियार) = गधा (एक जानवर)
100. गूंधना (सानना) = गूंथना (पिरोना)
101. गिरि (पर्वत) = गिरी (बिज का गूदा)
102. छत्र (छत) = क्षत्र (मुकुट)
103. छात्र (विद्यार्थी) = क्षात्र (क्षत्रिय)
104. तरणी (नाव) = तरुणी (युवती)
105. दूत (सन्देशवाहक) = दूयत (जुआ)
106. नारी (स्त्री) = नाडी (नब्ज)
107. प्रणय (प्रेम) = परिणय (विवाह)
108. पथ (रास्ता) = पथ्य (रोगी का भोजन)
109. बलि (भेंट) = बली (शक्तिशाली)
110. रक्त (खून) = रिक्त (खाली)
111. अमित (बहुत) = अमीत (शत्रु)
112. आर्त्त (दुखी)= आर्द्र (गीला)
113. ऋत (सत्य) = ऋतु (मौसम)
114. कपिश (मटमैला) = कपीश (वानरों का राज)
115. कुच (स्तन) = कूच (प्रस्थान)
116. गण (समूह) = गण्य (गिनने योग्य)
117. चषक (प्याला) = चसक (लत)
118. चक्रवाक (चकवा पक्षी) = चक्रवात (तूफान)
119. नत (झुका हुआ) = नित (प्रतिदिन)
120. नगर (शहर) = नागर (शहरी)
121. निशित (तीक्ष्ण) = निशीथ (आधी रात)
122. निसान (झंडा) = निशान (चिन्ह)
123. निशाकर (चन्द्रमा) = निशाचर (राक्षस)