चन्द्र्भेदी प्राणायाम-Left Nostril Breathing In Hindi
चन्द्रभेदी प्राणायाम को अंग्रेजी में Left Nostril Breathing के नाम से जाना जाता है।चन्द्रभेदी प्राणायाम का हमारे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस प्राणायाम को करने से हमारे शरीर में मौजूद नाड़ी जिसे इड़ा नाड़ी कहते हैं वह शुद्ध होती है जिससे शरीर की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं। इसको करने चन्द्र नाड़ी क्रियाशील हो जाती है इसलिए इसका नाम चन्द्र्भेदी प्राणायाम पड़ा। इस प्राणायाम का दूसरा नाम चन्द्र नाडी का भेदना है।
चन्द्र्भेदी प्राणायाम को करने की विधि-Steps of Chandrabhedi Pranayam
- सबसे पहले किसी समतल व् शांत जगह पर दरी, चटाई या आसन बिछाकर उस पर सुखासन की अवस्था में बैठ जाएँ।
- अब अपनी गर्दन मेरुदंड और कमर को सीधा करें।
- अब अपने बायें हाथ (उल्टा हाथ) को अपने बायें वाले घुटने पर रखें।
- और दायें हाथ(सीधा हाथ) के उंगूठे से दांय नाक के छेद को बंद कर दें अथार्त अंगूठे को नाक के छिद्र पर रख दें।
- अब अपनी बायीं नाक के छिद्र से लंबी और गहरी सांस को धीरे धीरे भरें और अपने हाथ की अंगुलियों से बायें नाक के छेद को भी बंद कर दें।
- अब आपको यहाँ पर कुंभक करना है अथार्त जितना हो सके अपनी स्वास को अंदर ही रोकें है।
- अब बाद में दाहिने नथुने से श्वास को धीरे-धीरे छोड़ दें।
- अब इस क्रिया को 10 मिनट तक दोहरायें।
चन्द्र्भेदी प्राणायाम के लिए समय अविधि-Times of Chandrabhedi Pranayam
अगर आपने ये प्राणायाम करना अभी शुरू ही किया है तो आप इसका अभ्यास आप 10-12 मिनट तक ही करें क्यूंकि इस प्राणायाम की समय अविधि एक साथ नहीं बढ़ानी चाहिए। और इस प्राणायाम को 24 घंटे में सिर्फ एक बार ही करें।
सुबह और शाम के समय खाली पेट इस प्राणायाम का अभ्यास करना अधिक फलदायी होता हैं। एक सामान्य व्यक्ति को चन्द्र्भेदी प्राणायाम शुरुआत में दस से पन्द्रह मिनट तक करना चाहिए। कुछ समय तक निरंतर अभ्यास करते रहने के बाद इसे बढ़ा देना चाहिए।
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चन्द्र्भेदी प्राणायाम से होने वाले लाभ-Benefits of Chandrabhedi Pranayam
1. मानसिक तनाव : चन्द्र्भेदी प्राणायाम के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव दूर होकर मन शांत होता है।
2. आंखों की समस्या : अगर कोई भी व्यक्ति इस प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास करता है तो वो अपनी आखों की समस्या से जल्द ही छुटकारा पा सकता है।
3. ब्लड प्रेशर को कम करे : चन्द्रभेदी प्राणायाम का अभ्यास करके हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को कम किया जा सकता है।
4. चन्द्र नाड़ी क्रियाशील : चन्द्रभेदी प्राणायाम से चन्द्र नाड़ी क्रियाशील होती है और शरीर के समस्त नाड़ी मंडल में शीतलता का संचार होता है।
5. चर्म रोग में : इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से चर्म रोगों में काफी लाभ पहुचता है।
6. दिल की बीमारी में : इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से दिल की सभी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
7. पेट की गर्मी : चन्द्रभेदी प्राणायाम को करने से पेट की गर्मी दूर होती है।
8-मुहं के छाले : चन्द्रभेदी प्राणायाम के अभ्यास से मुहं के छालों में राहत मिलती है।
9. पित्त रोग में : इस प्राणायाम को करने से पित्त रोग में बहुत लाभ होता है।
10. शरीर में फुर्ती :चन्द्रभेदी प्राणायाम को करने से शरीर की थकान दूर होकर शरीर में फुर्ती आती है।
चन्द्रभेदी प्राणायाम करते समय सावधानियां-Precaution of Chandrabhedi Pranayam
- यह प्राणायाम हमेशा खाली पेट करना चाहिए।
- इस प्राणयाम की अविधि एक साथ नहीं बढानी चाहिए।
- इस प्राणायाम का अभ्यास साफ-स्वच्छ हवा बहाव वाले स्थान पर करें।
- सर्दियों में तथा कफ प्रकृतिवालों के लिए यह हितकर नहीं है।
- निम्न रक्तचाप के रोगी इस प्राणायाम को न करें।
- एक ही दिन में सूर्य भेदन प्राणायाम और चंद्र भेदन प्राणायाम न करें।
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