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शीतकारी प्राणायाम विधि, लाभ और सावधानी-Sitkari Pranayama In Hindi

शीतकारी प्राणायाम-Sitkari Pranayama In Hindi

शीतकारी’ का अर्थ होता हैं ठंडक मतलब एसी चीज जो हमारे शरीर और मन को ठंडक पहुचाये इस प्राणायाम को करते समय मुंह से ‘सीत्‌’ शब्द की आवाज निकालनी होती हैं और इसी कारण से इस प्राणायाम का नाम शीतकारी प्राणायाम पड़ा।

इस प्राणायाम को सित्कार भी कहा जाता है। यह एक बेहद ही सरल प्राणायाम है। यह हमारे शरीर को शीतलता प्रदान करता है। यह शरीर की भीतरी सफाई कर इसे शुद्ध बनता हैं। यह अभ्यास कूलिंग प्राणायाम के अंतर्गत आता है। इन अभ्यासों को गर्मी के मौसम में ही करना चाहिए।


शीतकारी प्राणायाम करने की विधि-Steps of Sitkari Pranayama In Hindi

  • सबसे पहले किसी स्वच्छ व् समतल जमीन पर दरी, चटाई या फिर कोई आसन बिछा कर उस पर सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाये।
  • अब अपने मेरुदंड व् सिर और गर्दन को बिलकुल एक ही सीध में रखें।
  • अब नीचे के जबड़े के दांतों को ऊपर के जबड़े के दांतों पर रख रखें।
  • अब अपने दांतों के पीछे अपनी जीभ को लगाये और अपने मुंह को थोडा सा खुला रखें ताकि अच्छी तरह से स्वास अंदर आ सके।
  • अब अपनी जीभ को पीछे की ओर मोड़कर तालू से जीभ के अग्र भाग को लगा लें।
  • अब अपने दातों के बिच की जगह से श्वास धीरे-धीरे अन्दर लें स्वास ऐसा लें की सी की आवज हो।
  • अब यहाँ पर आपको कुंभक करना है अथार्त अब अपनी स्वांस को कुछ क्षणों तक रोक कर रखे फिर बाद में नाक से निकाल दें।
  • अब इसी क्रिया को 20-25 बार तक दोहरायें।

https://www.youtube.com/watch?v=64u4YXcI2YY&list=PLSUEXx6nr89skevUyCwXGVdY6lxGkEfnB


शीतकारी प्राणायाम के लिए समय अविधि-Times of Sitkari Pranayama In Hindi

अगर आपने ये प्राणायाम करना अभी शुरू ही किया है तो आप इसका अभ्यास आप 10-12 मिनट तक ही करें क्यूंकि इस प्राणायाम की समय अविधि एक साथ नहीं बढ़ानी चाहिए।

सुबह और शाम के समय खाली पेट इस प्राणायाम का अभ्यास करना अधिक फलदायी होता हैं। एक सामान्य व्यक्ति को शीतकारी प्राणायाम शुरुआत में दस से पन्द्रह बार करना चाहिए। कुछ समय तक निरंतर अभ्यास करते रहने के बाद इसे बढ़ा देना चाहिए।


यह भी पढ़ें :- Bhramari Pranayama , Chandrabhedi Pranayam


शीतकारी प्राणायाम से होने वाले लाभ-Benefits of Sitkari Pranayama In Hindi

1. आक्सीजन की मात्रा : शीतकारी प्राणायाम के नियमित अभ्यास करने से शरीर में आक्सीजन की मात्रा कम नहीं होती।

2. रक्त संचार प्रक्रिया : शीतकारी प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचार प्रक्रिया में सुधार आता है।

3. शरीर में फुर्ती : शीतकारी प्राणायाम करने से शरीर की थकान दूर होकर शरीर में फुर्ती आती है।

4. नीद से निजात पायें : अगर आपको नीद की समस्या है तो आप इस प्राणायम के अभ्यास से नीद न आने की समस्या से निजात पा सकते हैं।

5. पसीना नही आता : शीतकारी प्राणायाम करने से पूरे शरीर में शीतलता आती है और पसीना नहीं आता।

6. भूक को बढाता है : शीतकारी प्राणायाम करने से भूख-प्यास ना लगने की समस्या दूर होती है।

7. शारीरिक आभा को बढाए :- इस प्राणायाम के सुबह-सुबह नियमित अभ्यास से शारीरिक आभा को बढ़ाया जा सकता है।

8. इन सभी बीमारियों में : इस प्राणायाम को करने से कई तरह के रोग जैसे दंत रोग, पायरिया, गले और मुंह के रोग, नाक और जीभ के रोगो से लाभ मिलता है।

9. पेट की जलन : इस प्राणायाम का अभ्यास पेट में जलन की समस्या को दूर करते हैं।

10. शरीर का तापमान : इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर का तापमान संतुलित रहता है।

11. चेहरे पर चमक बने : इस प्राणायाम के अभ्यास से हम अपने चेहरे पर प्राक्रतिक चमक ला सकते हैं क्यूंकि यह ब्लड को सुद्ध करता है।

12. भीतरी अंगो की सफाई : यह प्राणायाम शरीर की भीतरी अंगों की भी सफाई करता है।


शीतकारी प्राणायाम करने में सावधानी-Precaution of Sitkari Pranayama In Hindi

  • इस प्रणायाम को हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए।
  • मुह में कफ व टॉन्सिल के रोगियों को यह प्राणायाम बिलकुल नहीं करना चाहिय।
  • सर्दियों के मौसम में इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • खुले सॉफ जगह पर ही इसका अभ्यास करें धूल वाले स्थान से बचें।
  • अस्थमा, सर्दी और खांसी की बीमारी में इस प्राणायाम को न करें।

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